कैसे तय होती है आपके पर्सनल लोन की EMI? जानिए क्या-क्या देखती हैं बैंक
क्या है खबर?
आज मेडिकल इमरजेंसी हो या बच्चों की पढ़ाई की पढ़ाई के लिए पैसों की जरूरत पड़ने पर पर्सनल लोन अच्छा विकल्प बन चुका है। पर्सनल लोन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई गारंटी या संपत्ति गिरवी नहीं रखनी पड़ती। इसी वजह से इसका ब्याज आमतौर पर ज्यादा होता है। ऐसे में लोन लेते समय सबसे अहम सवाल होता है कि हर महीने कितनी EMI देनी होगी और यह किन बातों पर निर्भर करती है?
क्रेडिट स्कोर
क्रेडिट स्कोर का पड़ता है असर
क्रेडिट स्कोर: अगर, आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे ज्यादा है तो बैंक कम ब्याज दर पर लोन देने के लिए तैयार रहते हैं। इससे EMI और कुल ब्याज घट जाता है। कम स्कोर वाले कर्जदारों के लिए ब्याज ज्यादा होती है, जिससे EMI बढ़ जाती है। ब्याज दर: लोन की EMI पर ब्याज दर का असर सबसे ज्यादा पड़ता है। 1-1.5 फीसदी ब्याज का फर्क EMI बढ़ाने के साथ लंबे समय में हजारों रुपये का बोझ बना देता है।
लोन राशि
लोन राशि से कम-ज्यादा होगी EMI
लोन राशि: लोन की रकम भी EMI तय करने में अहम भूमिका निभाती है। जितना ज्यादा लोन लेंगे, आपकी EMI उतनी ही ज्यादा होगी। लोन अवधि: लोन चुकाने की अवधि EMI को सीधे प्रभावित करती है। लंबी अवधि चुनने पर EMI कम हो जाती है, जबकि छोटी अवधि चुनने पर बढ़ जाती है। आय स्थिरता और दूसरे शुल्क: आपकी मासिक आय और नौकरी की स्थिरता भी EMI तय करने में अहम है।