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डेबिट और क्रेडिट कार्ड से कैसे काम करता है ऑटोपे? जानिए इसके फायदे
डेबिट और क्रेडिट कार्ड से ऑटोपे की सुविधा शुरू कर सकते हैं

डेबिट और क्रेडिट कार्ड से कैसे काम करता है ऑटोपे? जानिए इसके फायदे

May 19, 2026
08:19 am

क्या है खबर?

हर महीने आपको नल, बिजली, मोबाइल, वाई-फाई समेत कई तरह के बिलों का भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में किसी न किसी बिल के चूक जाने का अंदेशा बना रहता है। इस कारण आपको सेवा बंद होने या पैनल्टी चुकाने के रूप में खामियाजा भुगतना पड़ता है। ऐसी स्थिति में ऑटोपे आपके काम आता है। इससे आपका बिल तय तारीख पर अपने आप जमा हो जाता है। आइये जानते हैं क्रेडिट या डेबिट कार्ड में ऑटोपे कैसे काम करता है।

ई-मेंडेट 

ई-मेंडेट करना पड़ता है रजिस्टर 

ऑटोपे एक ई-मेंडेट सिस्टम है, जहां आप बैंक या कार्ड को इजाजत देते हैं कि वे हर महीने तय तारीख पर बिल अमाउंट अपने आप काट लें। ऑटोपे को आप अपने बैंक या सर्विस प्रोवाइडर की वेबसाइट या ऐप से सेट कर सकते हैं। यह सुविधा डेबिट और क्रेडिट कार्ड दोनों पर उपलब्ध है। आप फिक्स्ड या वैरिएबल अमाउंट के लिए ऑटोपे सेट कर सकते हैं। एक बार रजिस्ट्रेशन होने के बाद यह 7 दिनों में एक्टिवेट हो जाता है।

नियम 

ऑटोपे को लेकर क्या हैं नियम?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ई-मेंडेट नियमों के तहत यह सुरक्षित है। RBI ने ऑटोपे के लिए कुछ जरूरी नियम तय किए हैं। 15,000 रुपये तक के ऑटोपे ट्रांजैक्शन बिना OTP के पूरे हो सकते हैं, लेकिन इससे ज्यादा रकम पर OTP वेरिफिकेशन जरूरी है। इंश्योरेंस या म्यूचुअल फंड जैसी श्रेणी में यह सीमा 1 लाख रुपये तक है। इससे ऊपर के ट्रांजैक्शन पर बैंक आपके कार्ड से पैसा तभी काटेगा, जब आप OTP से मंजूरी देंगे।

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समस्या 

कार्ड खोने पर क्या होगा?

हर ट्रांजैक्शन से पहले बैंक आपको 24 घंटे पहले नोटिफिकेशन भेजता है, जिसमें पेमेंट कैंसिल करने का विकल्प भी रहता है। अगर, कार्ड खो जाए या ब्लॉक हो जाए तो पुराने ऑटोपे अपने आप बंद हो जाएंगे। ऐसे में दोबारा नया ई-मेंडेट रजिस्टर करना होगा। ऑटोपे से न सिर्फ बिल समय पर कटता है, बल्कि लेट फीस और झंझट से भी राहत मिलती है। बशर्ते आप खाते में समय पर बैलेंस बनाए रखें।

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