गोल्डमैन सैक्स ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलने का लगाया अनुमान
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि आने वाले महीनों में भारत के भुगतान संतुलन में अधिशेष (बचत) रहेगा और रुपये की गिरावट में भी कमी आएगी।
यह सकारात्मक अनुमान कई वजहों से लगाया गया है, जैसे विदेशों से आने वाला पैसा मजबूत हो रहा है, सेवाओं का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है और तेल का आयात भी घटा है।
कंपनी ने यह भी कहा कि रुपये में हाल की गिरावट भारत की आर्थिक बुनियाद की कमजोरी नहीं थी, बल्कि यह दुनियाभर में फैली अनिश्चितता, खासकर पश्चिम एशिया के तनाव के कारण हुई थी।
5,700 अरब रुपये के निवेश की उम्मीद
ऊर्जा दक्षता बढ़ने और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या की वजह से भारत अब तेल की बढ़ती कीमतों के प्रति उतना संवेदनशील नहीं रहा है।
गोल्डमैन सैक्स ने तो कैलेंडर वर्ष 2026 और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने घाटे के अनुमानों को भी घटा दिया है। उन्हें उम्मीद है कि भुगतान संतुलन में अधिशेष रहेगा, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कदमों से मिलने वाले करीब 60 अरब डॉलर (करीब 5,700 अरब रुपये) के निवेश की बड़ी भूमिका होगी।
ये कदम रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली और विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स में छूट जैसे उपायों से जुड़े हैं। इन सभी उपायों का लक्ष्य रुपये को स्थिर रखना और दुनियाभर में अनिश्चितता के बावजूद देश की आर्थिक स्थिरता को बनाए रखना है।