विदेशी निवेशक की भारतीय बाजार में शॉर्ट पोजीशन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयर बाजार के वायदा अनुबंधों (इंडेक्स फ्यूचर्स) में अपनी शॉर्ट पोजीशन लगातार बढ़ा रहे हैं।
यह बताता है कि उनका मूड अब पहले से ज्यादा सतर्क हो गया है। 18 सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक, निफ्टी और बैंक निफ्टी में उनकी करीब 2.88 लाख नेट शॉर्ट पोजीशन दर्ज की गई है। यह आंकड़ा पिछले सप्ताह के रिकॉर्ड स्तर से थोड़ा ही नीचे है।
इस महीने FPI ने भारतीय शेयरों में 20,974 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली भी की है, जो उनकी बढ़ती हुई बेचैनी को साफ दिखाता है।
वित्त वर्ष 2025 से अब तक निकाले 4 लाख करोड़ रुपये
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और दुनियाभर में जारी भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों के लिए हालात पेचीदा बना दिए हैं।
6 अगस्त को कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर (करीब 11,000 रुपये) प्रति बैरल से गिरकर 82.49 डॉलर (करीब 7,800 रुपये) पर आ गई थी, लेकिन पश्चिमी एशिया में नए संघर्ष शुरू होने के बाद शुक्रवार को यह फिर से बढ़कर 103.87 डॉलर (करीब 9,800 रुपये) पर पहुंच गई।
इसके साथ ही वैश्विक ब्याज दरों में बढ़ोतरी और महंगाई की चिंताएं भी बढ़ रही हैं, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान के हाल के कदमों के बाद।
ऐसे में यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि वित्त वर्ष 2025 की शुरुआत से अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल चुके हैं। इन सभी वजहों से निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं।