एलसीना ने सेमीकॉन 2.0 से भारत में चिप निर्माण को मजबूती मिलने की जताई संभावना
भारत के इलेक्ट्रॉनिक बाजार में इन दिनों बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। यह सब सरकार के उठाए कदमों का नतीजा है, जिनमें सेमीकॉन 2.0 और मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
इसी कड़ी में उद्योग के बड़े समूह एलसीना का कहना है कि इन कार्यक्रमों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) की मदद से स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) तक के लिए एक मजबूत स्थानीय सप्लाई चेन तैयार हो पाएगी। वे चिप डिजाइनर्स, पुर्जे बनाने वाली कंपनियों और उत्पादन करने वालों के बीच बेहतर तालमेल की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसा होने से भारत बढ़ती मांग को पूरा कर पाएगा और वैश्विक बाजार में भी अपनी जगह बना सकेगा।
85 फीसदी से ज्यादा चिप होती है आयात
भारत अपनी सेमीकंडक्टर की जरूरत का केवल 15 प्रतिशत ही देश में बना पाता है। बाकी 85 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा बाहर से मंगाना पड़ता है।
हर साल इंटीग्रेटेड सर्किट पर ही 23 अरब डॉलर (करीब 2,100 अरब रुपये) की भारी रकम खर्च होती है।
एलसीना का मानना है कि अगर, सेमीकॉन 2.0 के जरिए भारत में चिप डिजाइन और उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए तो आने वाले समय में आयात बिल को हर साल 10-20 अरब डॉलर (करीब 950-1,900 अरब रुपये) तक कम किया जा सकता है।