AI ने आधी कर दी डिलीवरी राइडर्स की कमाई, पारदर्शिता की उठी मांग
एडिनबर्ग में खाना डिलीवर करने वाले राइडर्स चाहते हैं कि डिलीवरू, उबर ईट्स और जस्ट ईट जैसे प्लेटफॉर्म बताएं कि उनके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम कैसे फैसले लेते हैं?
कई राइडर्स का कहना है कि ऑटोमेशन की वजह से उनकी कमाई कम हो गई है और काम भी अस्थिर हो गया है। एडिनबर्ग में 7 सालों से खाना डिलीवर कर रहे डेविड ने बताया कि उनकी कमाई 4 साल में आधी हो गई है, जबकि वे अब भी उतने ही घंटे काम करते हैं।
वर्कर्स ऑब्जर्वेटरी कर रही डायनामिक प्राइसिंग की जांच
इन सवालों के जवाब पाने के लिए राइडर्स 'वर्कर्स ऑब्जर्वेटरी' के जरिए सेंट एंड्रयूज और एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के शिक्षाविदों के साथ काम कर रहे हैं। वे इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि क्या एल्गोरिदम-आधारित डायनामिक प्राइसिंग ही उनकी घटती कमाई की वजह है।
स्कॉटिश कूरियर डिलन ने बताया कि 2023 में प्रति ऑर्डर मिलने वाला उनका औसत शुल्क 3.67 पाउंड (करीब 450 रुपये) था, जो 2026 की पहली छमाही में घटकर 3.42 पाउंड (करीब 420 रुपये) हो गया, जबकि डिलीवरी की संख्या पहले जितनी ही थी।
राइडर्स को फेशियल रिकग्निशन से जुड़ी गलतियों की भी शिकायत है, जिनकी वजह से कभी-कभी वे लॉग-इन नहीं कर पाते हैं।
डिलीवरू का कहना है कि सक्रिय ऑर्डर के दौरान वह न्यूनतम भुगतान की गारंटी देता है, लेकिन यूनियन का तर्क है कि ऐसे सिस्टम उनकी कमाई को लेकर अनिश्चितता पैदा करते हैं।