भारत में AI डाटा सेंटर क्षमता में 8 गुना उछाल
भारत के टेक क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। डेलायट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2031 तक देश की डाटा सेंटर क्षमता 1.5 गीगावाट (GW) से बढ़कर 12GW तक पहुंचने की उम्मीद है। यह करीब 100 अरब डॉलर (करीब 9,000 अरब रुपये) का बड़ा निवेश अवसर है, जिसका मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता प्रभाव है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल से अब काम पुराने CPUs की बजाय ताकतवर GPUs से होने लगा है। अभी यहां क्लाउड वर्कलोड्स में GPUs की हिस्सेदारी लगभग 30 फीसदी है, लेकिन अगले 5 सालों में यह आंकड़ा 70 फीसदी तक पहुंच सकता है।
GPU सेंटर्स बनाने में आता है ज्यादा खर्चा
GPU आधारित डाटा सेंटर्स बनाना सस्ता नहीं होता। इनकी लागत प्रति मेगावाट 3 से 3.5 करोड़ डॉलर (करीब 280-300 करोड़ रुपये) तक आती है, जबकि CPU आधारित सेंटर्स के लिए यह सिर्फ 1.2 करोड़ डॉलर (करीब 100 करोड़ रुपये) होती है।
हालांकि, भारत अपनी कम निर्माण लागत और सस्ती बिजली की वजह से इस दौड़ में काफी आगे है। निवेशकों को यहां के मददगार सरकारी नियम और ग्रीन डाटा सेंटर्स से जुड़ी योजनाएं भी खूब आकर्षित कर रही हैं। इन योजनाओं में रिन्यूएबल एनर्जी और सबमरीन केबल्स जैसी सुविधाओं पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।
फिर भी, इस क्षेत्र में कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। इनमें पानी का ज्यादा इस्तेमाल और नई स्टोरेज मेमोरी से जुड़ी दिक्कतें शामिल हैं।