भारतियों में बदल रहा कर्जे का चलन, RBI और CRIF की रिपोर्ट में खुलासा
CRIF के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में खरीदारी की आदतों में छोटे कर्ज का चलन बढ़ा है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) में 50,000 रुपये और उससे ज्यादा के लोन की हिस्सेदारी कुल कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में 29 फीसदी रही।
यह पिछले साल के मुकाबले करीब 5 प्रतिशत ज्यादा है। आजकल लोग क्रेडिट का इस्तेमाल कर इलेक्ट्रॉनिक्स और महंगे सामान खरीद रहे हैं।
इससे साफ पता चलता है कि अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज लेने का चलन अब बढ़ रहा है।
गैर-आवासीय खुदरा कर्ज 58.4 फीसदी हुआ
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, आवास को छोड़कर बाकी खुदरा कर्ज अब परिवारों के कुल कर्ज का 58.4 फीसदी हो गए हैं।
यह दिखाता है कि लोग अब पारंपरिक होम लोन के बजाय दूसरी जरूरतों के लिए भी कर्ज ले रहे हैं। इसी चलन के कारण, बजाज फाइनेंस के अर्बन कंज्यूमर फाइनेंस बिजनेस में करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
एक ओर जहां बैंक और फाइनेंस कंपनियां नए अवसर देख रही हैं, वहीं दूसरी ओर, चोलामंडलम ने चेतावनी दी है कि अगर, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव वित्त वर्ष 2027 तक बना रहता है तो इससे महंगाई बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में लोगों के लिए खुलकर खर्च करना मुश्किल हो जाएगा।