HCL टेक ने AI सुविधा के लिए किया करीब 100 अरब रुपये का बड़ा सौदा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ बेहतरीन तकनीक तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यह असल में पैसा कमाने का जरिया बन गया है।
अब कंपनियों का जोर सिर्फ स्मार्ट फीचर्स दिखाने पर नहीं, बल्कि इस बात पर है कि AI कैसे उनके खर्च घटाकर मुनाफा बढ़ा सकता है।
HCL टेक ने हाल ही में 1.14 अरब डॉलर (करीब 100 अरब रुपये) का सौदा किया है, जिसके तहत वह एक फॉर्च्यून ग्लोबल 5 कंपनी के AI-आधारित संचालन को 2031 तक संभालेगी। इस बात का पुख्ता सबूत है कि बड़े बिजनेस को अब सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि ठोस नतीजे चाहिए।
फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स की हो रही नियुक्ति
अब AI सिर्फ छोटे-मोटे ट्रायल प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे मुख्य बिजनेस जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह ठीक वैसा ही बदलाव है जैसा इंटरनेट और क्लाउड कंप्यूटिंग के साथ हुआ था। कंपनियां जैसे-जैसे अपना विस्तार कर रही हैं, वे 'फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स' (FDEs) जैसे विशेषज्ञों को काम पर रख रही हैं। यह भूमिका तकनीकी कौशल और बिजनेस की समझ को मिलाकर AI को असल में जमीन पर उतारते हैं।
पैलेंटिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एलेक्स कार्प ने कहा है कि बिजनेस ऐसे किफायती मॉडल चाहते हैं, जो काम को पूरा कर सकें।
भारत इस प्रतिभा के लिए एक वैश्विक केंद्र बन सकता है, जिससे पूरी दुनिया में AI को अपनाने की अगली लहर को बढ़ावा मिलेगा।