
बायजू ने आकाश एजुकेशनल सर्विस को 73 अरब रुपये में खरीदा- रिपोर्ट
क्या है खबर?
देश के सबसे बड़े ऑनलाइन-एजुकेशन स्टार्टअप बायजू (byju's) ने इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी कराने वाली कंपनी आकाश एजुकेशनल सर्विस लिमिटेड को एक अरब डॉलर (73.12 अरब रुपये) में खरीदने का सौदा कर लिया है।
यह दुनिया में एडुटेक सेक्टर के सबसे बड़े सौदों में से एक है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगले दो-तीन महीनों में यह सौदा पूरा हो जाएगा। बता दें कि बायजू 877 अरब रुपये की वैल्यू के साथ देश का दूसरा सबसे वैल्यूबल स्टार्टअप है है।
आधिकारिक पुष्टि
सौदे को लेकर अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं
कोरोना वायरस महामारी के दौरान पाबंदियों के चलते देश और दुनिया में ऑनलाइन एजुकेशन की मांग काफी बढ़ी थी।
बायजू ने इस मौके का फायदा उठाते हुए अपनी पहुंच को मजबूत कर लिया था।
बायजू को फेसबुक के मार्क जकरबर्ग के चान जकरबर्ग इनीशिएटिव और टाइगर ग्लोबल मैनेजमेंट एंड बॉन्ड कैपिटल आदि से फंडिंग मिली हुई है।
आकाश और बायजू के बीच सौदे को लेकर दोनोें ही पक्षों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।
सौदा
सौदे के बाद चौधरी परिवार हो जाएगा बाहर
दूसरी तरफ देशभर में 200 से अधिक ट्यूशन सेंटरों वाली आकाश एजुकेशनल सर्विस लिमिटेड में ब्लैकस्टोन ग्रुप का निवेश है।
बताया जा रहा है कि बायजू के साथ सौदे के बाद आकाश का फाउंडर चौधरी परिवार पूरी तरह बाहर हो जाएगा, जबकि ब्लैकस्टोन अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बायजू के स्टेक के साथ स्वैप करेगा।
महामारी के कारण ऑफलाइन ट्यूशन सेंटरों पर बुरा असर पड़ा था और देशभर में कई ऐसे सेंटर बंद हो चुके हैं।
जानकारी
व्हाइटहैट जूनियर का भी अधिग्रहण कर चुकी है बायजू
आकाश का अधिग्रहण करने से पहले बायजू ने एक और उपलब्धि हासिल की थी। इसने पिछले साल अगस्त में महामारी के बीच एडुटेक सेक्टर की एक और कंपनी व्हाइटहैट जूनियर का अधिग्रण किया था। यह कंपनी बच्चों को कोडिंग सिखाती है।
शुरुआत
2011 में शुरू हुई थी बायजू
बायजू की शुरुआत 2011 में हुई थी। उस वक्त एक पूर्व शिक्षक बायजू रविंद्रन ने एक स्मार्टफोन ऐप के तौर पर इसकी शुरुआत की थी।
आज इसके देश के 1,700 शहरों में 7 करोड़ यूजर हैं। इनमें से 45 लाख पेड यूजर हैं।
यह ऐप किंडरगार्टन से लेकर 12वीं क्लास के बच्चों के लिए एजुकेशनल कंटेट बनाती है। कंपनी ने इस वित्त वर्ष के दौरान अपना रेवेन्यू दोगुना करके 1 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।