देश में कर्जदारों पर कम हो रहा माइक्रोफाइनेंस का बोझ
भारत के माइक्रोफाइनेंस सेक्टर से एक अच्छी खबर सामने आई है। उन कर्जदारों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो 4 से ज्यादा कर्जदाताओं से कर्ज लेते रहे हैं।
मार्च, 2024 में ऐसे लगभग 56 लाख कर्जदार थे, जो जून, 2026 के अंत तक घटकर सिर्फ 13.5 लाख रह गए हैं। इसका मतलब है कि अब ये कुल कर्जदारों का महज 2 प्रतिशत ही हैं।
हालांकि, इन लोगों पर अभी भी 14,711 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है, लेकिन सख्त कर्ज देने वाले नियमों की वजह से यह बदलाव दिख रहा है और कर्ज व्यवस्था अब ज्यादा नियंत्रित नजर आ रही है।
बहुत ज्यादा लोन लेने वालों पर 7.5 फीसदी डिफॉल्ट का खतरा
ज्यादा लोन लेने वाले कर्जदारों के लिए जोखिम काफी ज्यादा है, खासकर उन कर्जों में जिन पर 30 से 180 दिन तक भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे जोखिम वाले कर्ज 'डिलीन्क्वेन्सी' कहलाते हैं। इन कर्जदारों के लिए डिफाॅल्ट की दर लगभग 7.5 फीसदी है। अगर, तुलना करें तो जिन कर्जदारों ने एक या 2 संस्थानों से कर्ज लिया है, उनके लिए यह जोखिम केवल 1.9 फीसदी है और 3 संस्थानों से कर्ज लेने वालों के लिए यह 4.1 फीसदी है।
मार्च, 2024 में पूरे माइक्रोफाइनेंस बाजार का आकार रिकॉर्ड 4.43 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि, सख्त नियमों के लागू होने के बाद पिछले 2 सालों में करीब 2.1 करोड़ लोग इस व्यवस्था से बाहर भी निकल गए।
बड़े माइक्रोफाइनेंस संस्थान इन बदलावों को छोटे संस्थानों के मुकाबले ज्यादा अच्छे से संभाल पा रहे हैं। छोटे संस्थान अभी भी फंड की कमी और लिक्विडिटी (तरलता) की समस्या से जूझ रहे हैं।