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बजट 2026 से शादीशुदा करदाता क्या चाहते हैं?
शादीशुदा करदाताओं के लिए टैक्स से जुड़े कोई अलग नियम नहीं हैं

बजट 2026 से शादीशुदा करदाता क्या चाहते हैं?

Jan 21, 2026
08:54 am

क्या है खबर?

शादीशुदा करदाता बजट 2026 में एक बड़े बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। भारत में अभी शादीशुदा करदाताओं के लिए टैक्स से जुड़े कोई अलग नियम नहीं हैं। पति और पत्नी को अलग-अलग करदाता माना जाता है और दोनों को अलग टैक्स भरना होता है। जबकि असल जीवन में परिवार मिलकर कमाई, खर्च और जिम्मेदारियां निभाता है। इसी वजह से अब मांग उठ रही है कि टैक्स सिस्टम को परिवार के नजरिए से भी देखा जाए।

#1

जॉइंट टैक्स फाइलिंग की मांग

शादीशुदा करदाताओं की सबसे बड़ी मांग यह है कि उन्हें जॉइंट टैक्स फाइलिंग का विकल्प मिले। अगर पति-पत्नी मिलकर टैक्स भर सकें, तो कई परिवारों का कुल टैक्स बोझ कम हो सकता है। खासकर उन घरों को फायदा मिलेगा जहां एक ही व्यक्ति कमाता है। जॉइंट फाइलिंग से परिवार की कुल आय को जोड़कर टैक्स लगाया जा सकेगा, जिससे टैक्स प्लानिंग आसान होगी और बचत के बेहतर मौके मिल सकेंगे।

#2

टैक्स छूट और डिडक्शन को लेकर अपेक्षाएं

देश के शादीशुदा करदाता चाहते हैं कि बजट में टैक्स छूट और डिडक्शन को परिवार के नजरिए से देखा जाए। होम लोन, हेल्थ इंश्योरेंस और बच्चों की पढ़ाई जैसे खर्च पूरे परिवार से जुड़े होते हैं। जॉइंट टैक्स सिस्टम होने पर इन डिडक्शन का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है। करदाताओं को उम्मीद है कि सरकार टैक्स स्लैब और बेसिक छूट सीमा में बदलाव कर परिवारों को कुछ राहत दे सकती है।

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#3

स्वैच्छिक विकल्प और संतुलन की उम्मीद

बजट 2026 से शादीशुदा करदाता यह भी चाहते हैं कि जॉइंट टैक्स फाइलिंग को अब अनिवार्य न बनाया जाए। जिन परिवारों में पति-पत्नी दोनों अच्छी कमाई करते हैं, उनके लिए मौजूदा सिस्टम ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। इसलिए बजट से उम्मीद है कि सरकार ऐसा विकल्प दे, जिसमें करदाता अपनी सुविधा के अनुसार सिस्टम चुन सकें। इससे टैक्स व्यवस्था संतुलित रहेगी और सभी तरह के परिवारों को न्याय मिल सकेगा।

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