बजट 2026: रेलवे को मिले 2.93 लाख करोड़ रुपये, जानिए क्या-क्या घोषणाएं हुई
क्या है खबर?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय आम बजट पेश किया। इसमें रेल मंत्रालय को कुल 2.93 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय आवंटित किया गया है। हालांकि, बजट 2026 में इसे कुल 2.78 करोड़ रुपये का परिव्यय प्राप्त हुआ है। यह मंत्रालय के लिए अब तक का सबसे अधिक आवंटन है, जो सरकार की बुनियादी ढांचे के विस्तार और यात्रियों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उद्देश्य
क्या है रेल बजट में बढ़ोतरी का उद्देश्य?
वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में रेलवे को 2.65 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन इस बार इसमें 28,000 करोड़ की बढ़ोतरी की गई है। इसका उद्देश्य रेलवे के आधुनिकीकरण को गति देना, जिसमें 7 नए हाई-स्पीड कॉरिडोर का विकास और 'कवच' सुरक्षा प्रणाली का विस्तार शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप, यह बजट भारतीय रेल को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने और लोगों की सुरक्षित यात्रा पर केंद्रित है।
ऐलान
7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान
वित्त मंत्री सीतारमण ने अपने बजट भाषण में 'विकसित भारत' के विजन को धरातल पर उतारने के लिए कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव खेला है। उन्होंने देश में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण की घोषणा की है, जिनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और सिलीगुड़ी-वाराणसी शामिल हैं। यह पहल महानगरों के बीच की दूरी कम करते हुए व्यापारिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा देगी।
फायदा
7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनने से क्या होगा फायदा?
मुंबई-पुणे कॉरिडोर बनने से दो प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र 25-30 मिनट रह जाएगा। पुणे-हैदराबाद कॉरिडोर पश्चिम और दक्षिण भारत के IT हब को आपस में जोड़ेगा और हैदराबाद-बेंगलुरु कॉरिडोर से 2 सबसे बड़े तकनीकी शहरों के बीच कनेक्टिविटी तेज हो सकेगी। इसी तरह हैदराबाद-चेन्नई कॉरिडोर दक्षिण-पूर्वी तट के व्यापार और परिवहन को नई गति देगा, चेन्नई-बेंगलुरु कॉरिडोर बंदरगाह और औद्योगिक क्षेत्र के बीच माल परिवहन और यात्रा को सुगम बनाएगा।
जानकारी
दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर से क्या होगा फायदा?
दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर दिल्ली को देश की सांस्कृतिक राजधानी और महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र से जोड़ेगा। वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर उत्तर प्रदेश को उत्तर-पूर्व के प्रवेश द्वार से जोड़कर पूर्वी भारत में आर्थिक क्रांति लेकर आएगा।
कॉरिडोर
नए समर्पित फ्रेट कॉरिडोर की भी हुई घोषणा
बजट में बुनियादी ढांचे को मजबूती देते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने सूरत (गुजरात) से डानकुनी (पश्चिम बंगाल) तक एक नए समर्पित फ्रेट कॉरिडोर (DFC) की घोषणा की है। यह नया 'ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर' औद्योगिक केंद्रों को सीधे बंदरगाहों से जोड़ेगा, जिससे माल ढुलाई की लागत कम होगी और रफ्तार भी बढ़ सकेगी। यह कदम विशेष रूप से बंगाल और गुजरात के व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा। इससे माल ढुलाई मार्ग को नई दिशा मिल सकेगी।
अन्य
इन कार्यों पर भी खर्च होगा रेल बजट
वित्त मंत्री सीतारमण की ओर से रेलवे को आवंटित किए गए 2.93 लाख करोड़ रुपये के बजट में 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और नया समर्पित फ्रेट कॉरिडोर बनाए जाने के साथ नई रेल लाइनों का निर्माण, गेज परिवर्तन, दोहरीकरण, यातायात सुविधाएं और रोलिंग स्टॉक आदि कार्य भी किए जाएंगे। इसी तरह नई ट्रेनों के संचालन और रेल विद्युतीकरण योजनाएं भी पूरी की जाएंगी। इन सभी की घोषणा रेलवे द्वारा की जाएगी।