मध्य पूर्व के तनाव और महंगे कच्चे तेल से अमेरिकी डॉलर हुआ मजबूत
बुधवार (2 सितंबर) को अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिली। इसकी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव रहे। ब्रेंट क्रूड 95.52 डॉलर (करीब 9,000 रुपये) प्रति बैरल तक पहुंच गया, वहीं अमेरिकी WTI 91.02 डॉलर (करीब 8,600 रुपये) पर चढ़ गया।
ईरान पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद बाजार में घबराहट बढ़ गई। ऐसे माहौल में निवेशकों ने सुरक्षित ठिकाना मानकर डॉलर में पैसा लगाना बेहतर समझा।
डॉलर के मुकाबले येन हुआ कमजोर
अमेरिकी 10-साल के ट्रेजरी यील्ड के 4.8 फीसदी पर पहुंचने के बाद सितंबर में फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें बढ़ने की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं।
बाजार अब इसे काफी हद तक तय मान रहा है, जिसकी 67 फीसदी संभावना जताई जा रही है। भले ही जॉब ग्रोथ धीमी है और महंगाई अभी भी बनी हुई है, लेकिन फेड का अगला कदम आने वाले आर्थिक डाटा पर ही निर्भर करेगा।
इस बीच, जापानी येन अभी भी दबाव में है। ऐसा तब हो रहा है, जब बैंक ऑफ जापान द्वारा इस महीने ब्याज दरें बढ़ने की प्रबल उम्मीदें हैं, जिसके चलते डॉलर इसके मुकाबले और मजबूत हो गया है।