ट्रेडिंग करने वालों के लिए ITR दाखिल करने के लिए कितनी है ऑडिट की सीमा?
शेयर बाजार के ट्रेडर्स को आकलन वर्ष 2026-27 के इनकम टैक्स रिर्टन (ITR) दाखिल करने के लिए अपना टैक्स ऑडिट कराना होगा। उन्हें यह तब कराना पड़ेगा, जब उनका सालाना कारोबार 1 करोड़ रुपये या 10 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाए। जो लोग इंट्राडे या F&O ट्रेडिंग में लगे हैं और उनका कोई रजिस्टर्ड ट्रेडिंग बिजनेस नहीं है, उनके मुनाफे या नुकसान को सट्टा व्यापार की आय माना जाता है।
आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आपको टैक्स ऑडिट से जुड़े कुछ खास नियमों को जानना जरूरी होगा।
क्या है ऑडिट के नियम?
आपको टैक्स ऑडिट करवाना जरूरी होगा। अगर, आपका ट्रेडिंग टर्नओवर एक करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाता है। हालांकि, अगर आपके ज्यादातर लेन-देन बैंकों के माध्यम से होते हैं तो यह सीमा 10 करोड़ रुपये तक बढ़ जाती है।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, टर्नओवर का मतलब है आपके सभी सौदों के कुल फायदे और नुकसान को जोड़कर निकली हुई रकम है। यह भी याद रखें कि सट्टा व्यापार में हुए नुकसान को सिर्फ सट्टा व्यापार के मुनाफे से ही एडजस्ट किया जा सकता है। इसे अधिकतम 4 सालों तक आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए आपको तय समय पर अपना ITR फाइल करना होगा।