SEBI की टीम 5 सालों में 10 गुना बढ़ी, AI से पकड़ रहा धोखाधड़ी
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपनी इंजीनियर्स और विश्लेषकों की टीम को काफी बढ़ा दिया है। 5 साल पहले इसमें करीब 20 लोग थे, लेकिन अब यह संख्या 200 से भी ज्यादा हो गई है। SEBI का मकसद है बाजार में होने वाली धोखाधड़ी और गलत कामों को पहचानना, ताकि भारतीय शेयर बाजार निष्पक्ष और सही तरीके से काम कर सके।
यह बड़ा बदलाव तब आया जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने जेपी मॉर्गन चेज एंड कंपनी की एक यूनिट से जुड़ी एक नई शुरू हुई क्लोजिंग ऑक्शन (बंद नीलामी) में कुछ संदिग्ध गतिविधि का पता लगाने में SEBI की मदद की। AI की इस मदद से उसने तुरंत कार्रवाई की।
सोशल मीडिया पर 40 फीसदी बढ़ी कार्रवाई
SEBI के AI टूल्स अब सोशल मीडिया पर भी बाजार से जुड़ी अफवाहों और झूठी खबरों पर पैनी नजर रख रहे हैं। ऐसी पोस्ट को हटवाने के लिए उसकी तरफ से भेजी जाने वाली रिक्वेस्ट में अब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जो हर महीने लगभग 7,000 तक पहुंच गई हैं।
इसका सीधा मकसद भारत के 14 करोड़ छोटे निवेशकों को ऐसी गलत जानकारियों से बचाना है। हालांकि, टीम को कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है, जैसे डाटा से छेड़छाड़ का खतरा और ग्लोबल लेवल पर GPU की कमी।