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कारों में क्या होता है ऑटो डिमिंग ORVM? जानिए कैसे करता है काम 
ऑटो डिमिंग ORVM पीछे के वाहनों की रोशनी की चकाचौंध कम करते हैं (तस्वीर: अनस्प्लैश)

कारों में क्या होता है ऑटो डिमिंग ORVM? जानिए कैसे करता है काम 

Oct 11, 2025
06:45 pm

क्या है खबर?

वाहनों की हेडलाइट्स की चकाचौंध से रात में कार चलाना किसी चुनौती से कम नहीं है। पीछे चल रहे वाहन की तेज रोशनी के कारण कई बार बचाव करना मुश्किल हो जाता है। इससे हासदे की आशंका बनी रहती है। ऑटो डिमिंग आउटसाइड रियर व्यू मिरर (ORVM) इस समस्या को कम करने और सुरक्षा बढ़ाने में बहुत काम आता है। आइए जानते हैं गाड़ी में ऑटो डिमिंग ORVM कैसे काम करता है और इसके क्या फायदे हैं।

ऑटो डिमिंग ORVM

क्या होते हैं ऑटो डिमिंग ORVMs?

ऑटो डिमिंग ORVMs पीछे चल रहे वाहनों की हेडलाइट्स की चमक को कम करने के लिए अपनी परावर्तकता (रिफ्लेक्टिविटी) को ऑटोमैटिक रूप से एडजेस्ट करते हैं। यह मिरर की सतह से प्रकाश को परावर्तित करने की क्षमता होती है। ये इंटेलिजेंट सेंसर सिस्टम और इलेक्ट्रोक्रोमिक तकनीक से काम करते हैं। चालक को अस्थायी रूप से अंधे होने से बचाती है, जिससे सड़क पर बेहतर तरह से देखने और समय पर प्रतिक्रिया देने में मदद करता है।

सेंसर 

सेंसर लगाते हैं चकाचौंध का पता 

ऑटो डिमिंग ORVMs में 2 लाइट सेंसर लगे होते हैं। इनमें से एक आगे की तरफ होता है, जो वातावरण के प्रकाश के स्तर का पता लगाता है। दूसरा सेंसर पीछे की ओर होता है, जो पीछे के वाहनों से आने वाले प्रकाश का पता लगाता है। जब पीछे वाले सेंसर पर हेडलाइट की तेज रोशनी पड़ती है और सामने वाला सेंसर आस-पास अंधेरा होने की जानकारी देता है तो सिस्टम चकाचौंध की स्थिति को पहचान लेता है।

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बदलाव 

ऐसे होता है मिरर के रंग में बदलाव 

चकाचौंध का पता चलने के बाद मिरर के अंदर कांच की 2 परतों के बीच रखे इलेक्ट्रोक्रोमिक जैल या फ्लुइड पर विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है। यह जैल विद्युत आवेश की प्रतिक्रिया में गहरा हो जाता है, जिससे चालक की आंखों में परावर्तित प्रकाश की मात्रा कम हो जाती है। सिस्टम लगातार प्रकाश के स्तर की निगरानी करता है और मिरर के रंग को एडजेस्ट करता है। चकाचौंध कम होने पर मिरर सामान्य स्थिति में आ जाता है।

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फायदा 

इन फायदों के साथ आता है यह फीचर  

यह सुविधा पीछे आ रहे वाहनों की चकाचौंध को काफी कम करता है, जिससे आंखों के सामने अचानक से अंधेरा छाने की स्थिति नहीं बनती। चालक की सड़क और आस-पास के वातावरण को देखने की क्षमता में सुधार करता है। रात में गाड़ी चलाते समय आंखों पर कम दबाव पड़ने से थकान भी कम होती है। आपको मैनुअल रूप से मिरर एडजेस्ट करने या लीवर घुमाने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे चालक का पूरा ध्यान सड़क पर लगा सकता है।

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