इन फीचर्स की एंट्री-लेवल बाइक में नहीं खास जरूरत, जानिए क्यों नहीं है उपयोगी
क्या है खबर?
भारतीय दोपहिया वाहन बाजार में बाइक्स नए-नए फीचर्स के साथ महंगी होती जा रही हैं। अब 125-180cc मोटरसाइकिल्स में अब ब्लूटूथ कनेक्टविटी वाले इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर से लेकर राइडिंग मोड जैसे फीचर मिलते हैं, जो पहले बड़ी और महंगी बाइक्स में मिलते थे। ये फीचर मार्केटिंग के हिसाब से बाइक को महंगी और प्रीमियम बनाते हैं, लेकिन रोजाना के इस्तेमाल में इनकी उपयोगिता बहुत सीमित है। आइये जानते हैं एंट्री-लेवल बाइक्स में मिलने वाले अनुपयोगी फीचर्स कौनसे हैं।
#1
शहर की सड़कों पर उपयोगी नहीं यह फीचर
क्रूज कंट्रोल हाईवे पर लंबी दूरी तय करना है, जहां लगातार एक रफ्तार बनाए रखी जा सके। बड़ी टूरिंग बाइक्स में यह फीचर थकान कम करता है और राइड को आरामदायक बनाता है। इस फीचर का इस्तेमाल एंट्री-लेवल और शहर की सड़कों पर न के बराबर है। सड़कों पर गड्ढे, स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक के बीच इस फीचर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इस कारण यह महज दिखावटी सुविधा बनकर रह जाती है।
#2
बेहतर नहीं मिलती नेविगेशन की सुविधा
लेटेस्ट बाइक्स के इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर में टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन की सुविधा मिलती है। इसके इस्तेमाल से बार-बार आपको अपने स्मार्टफोन को जेब से निकाल कर मैप देखने की जरूरत नहीं पड़ती है। हकीकत में छोटे LCD डिस्प्ले, धीमी ब्लूटूथ कनेक्टिविटी और सीमित मैप डाटा के साथ इसकी उपयोगिता कुछ खास नहीं रहती है। वर्तमान, में स्मार्टफोन को हैंडलबार माउंट पर लगाकर बेहतर नेविगेशन की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। इसके बावजूद कंपनियां इस फीचर को जोर-शोर से पेश करती हैं।
#3
ग्राहकों को आकर्षित करने का तरीका
मोटरसाइकिल्स में इको, रेन या स्पोर्ट जैसे राइड मोड्स दिए जा रहे हैं, जो अलग-अलग परस्थितियों के हिसाब से रफ्तार बदलने की सुविधा देते हैं। साथ ही ये मोड रेसिंग मोटरसाइकिल का भ्रम पैदा कर सकते हैं, लेकिन सीमित पावर आउटपुट और सस्ते ECU के चलते इन मोड्स के बीच परफॉर्मेंस का अंतर बहुत मामूली होता है। स्पोर्ट मोड का नाम ही खरीदारों को आकर्षित करने के लिए काफी होता है। इसका व्यवहारिक फायदा कम होता है।