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EV लंबे समय के लिए ज्यादा भरोसेमंद और टिकाऊ समाधान, अध्ययन में किया दावा
EV कम परिचालन खर्च और पर्यावरण के हिसाब से बेहतर विकल्प है

EV लंबे समय के लिए ज्यादा भरोसेमंद और टिकाऊ समाधान, अध्ययन में किया दावा

Jul 22, 2026
12:29 pm

क्या है खबर?

E20 (20 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर चल रहे विवाद के बीच गाड़ी खरीदने वालों के लिए भ्रम की स्थिति बन गई है। इसे लेकर फैली उलझन और डर की वजह से वे फैसला नहीं कर पा रहे कि ICE मॉडल खरीदें या इलेक्ट्रिक कार। इसी बीच, B2K एनालिटिक्स के अध्ययन में कहा गया है कि देश में मोबिलिटी ट्रांजिशन (यातायात के तरीकों में बदलाव) के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियां लंबे समय के लिए ज्यादा भरोसेमंद और टिकाऊ विकल्प हैं।

रीफ्यूलिंग नेटवर्क 

रीफ्यूलिंग नेटवर्क के कारण पेट्रोल गाड़ियां अभी बेहतर विकल्प 

अध्ययन के अनुसार, देश की ज्यादातर आबादी के लिए पेट्रोल गाड़ियां अभी सबसे किफायती और व्यावहारिक विकल्प हो सकती हैं क्योंकि इनका रीफ्यूलिंग नेटवर्क अच्छी तरह से बना हुआ है और शुरुआती लागत भी कम है।

हालांकि, जीरो टेलपाइप एमिशन (गाड़ी से निकलने वाला धुआं न होना) की वजह से EVs लंबे समय की सस्टेनेबिलिटी के लिए बेहतर स्थिति में हैं।

इनको चलाने और उनके रखरखाव का खर्च कम होता है और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बेहतर हो रहा है।

लागत 

लागत के आधार पर फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां महंगी 

तीनों तरह की गाड़ियों की लागत का विश्लेषण सालाना 15,000 किलोमीटर की ड्राइविंग और 5 साल तक गाड़ी रखने की अवधि को ध्यान में रखकर किया गया है।

इससे पता चला कि पेट्रोल कार सबसे किफायती विकल्प है, जिसकी फ्यूल की लागत 4.49 रुपये/किलोमीटर हो जाती है।

EV की कीमत ज्यादा है, लेकिन ऑपरेटिंग खर्च सबसे कम 1.12 रुपये/किलोमीटर है। दूसरी तरफ, E85-कम्पैटिबल फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ी (FFV) की कुल लागत सबसे ज्यादा है। फ्यूल लागत 4.86 रुपये/किलोमीटर है।

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निष्कर्ष 

मोबिलिटी बदलाव के लिए EV सही चुनाव   

अध्ययन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भले ही E85 और EV दोनों ही पेट्रोल के विकल्प हैं, लेकिन भारत में मोबिलिटी में बदलाव के लिए EV ज्यादा भरोसेमंद और लंबे समय तक चलने वाला टिकाऊ रास्ता नजर आते हैं।

जैसे-जैसे चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ेगा और बैटरी की कीमतें कम होंगी, EV ज्यादा ग्राहकों के लिए किफायती और व्यावहारिक हो जाएंगी।

इस कारण EV में टिकाऊ विकल्प के तौर पर उभरने की ज्यादा क्षमता है।

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