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क्या ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरेंगे सऊदी अरब और UAE? उठाया बड़ा कदम
क्या ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरेंगे सऊदी अरब और UAE?

क्या ईरान के खिलाफ युद्ध में उतरेंगे सऊदी अरब और UAE? उठाया बड़ा कदम

Mar 24, 2026
04:26 pm

क्या है खबर?

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध में हर दिन के साथ नए मोड़ आ रहे हैं। सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर 5 दिन के लिए हमले रोकने का ऐलान करते हुए समझौता होने की बात कही थी। इस बीच सामने आया है कि ईरान के हमलों से दुखी होकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब ने अमेरिका का सहयोग करने का निर्णय किया है। आइए पूरी खबर पर नजर डालते हैं।

अनुमति

सऊदी सरकार ने अमेरिका को दी किंग फहद हवाई अड्डे के इस्तेमाल की अनुमति

वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब सरकार ने अमेरिकी सेना को अरब प्रायद्वीप के पश्चिमी हिस्से में स्थित किंग फहद हवाई अड्डे के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। यह कदम संभवतः सऊदी अरब के उस पूर्व सार्वजनिक रुख के विपरीत है जिसमें उसने कहा था कि वह न तो अपनी सुविधाओं और न ही अपने हवाई क्षेत्र को ईरान के खिलाफ अभियानों के लिए इस्तेमाल करने देगा। अब इस निर्णय ने चिंता बढ़ा दी है।

विचार

क्राउन प्रिंस कर रहे सीधे हमला करने पर विचार- रिपोर्ट

सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ईरान के खिलाफ सीधे हमलों में शामिल होने के फैसले पर विचार कर रहे हैं। एक सूत्र ने WSJ से कहा, "युद्ध में उनका प्रवेश कब होगा, यह सवाल नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि वे शामिल होंगे या नहीं।" पिछले सप्ताह सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने कहा था कि ईरानी हमलों के बीच यह मानना ​​कि खाड़ी देश जवाबी कार्रवाई करने में असमर्थ हैं, एक गलतफहमी है।

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सख्ती

UAE सरकार ने ईरान के खिलाफ उठाया यह बड़ा कदम

UAE सरकार ने अपनी धरती पर ईरान की वित्तीय उपस्थिति को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। दुबई अधिकारियों ने हाल ही में ईरानी अस्पताल और ईरानी क्लब दोनों को बंद कर दिया है, जिसके चलते अस्पताल की फोन लाइनें, व्हाट्सऐप चैनल और वेबसाइट निष्क्रिय हैं। दुबई के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि ये सुविधाएं अब कार्यरत नहीं है। UAE ने अपने वित्तीय तंत्र में रखी ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को फ्रीज करने की चेतावनी भी दी है।

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परिणाम

UAE के इस कदम के क्या होंगे परिणाम?

विश्लेषकों का कहना है कि UAE सरकार का यह कदम ईरान की विदेशी मुद्रा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क तक पहुंच को काफी हद तक सीमित कर सकता है। इसका कारण है कि UAE लंबे समय से ईरानी व्यवसायों और व्यक्तियों के लिए एक वित्तीय प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता रहा है। UAE ने ये कदम ऐसे समय में उठाए हैं जब ईरान की घरेलू अर्थव्यवस्था पहले से ही मुद्रास्फीति और प्रतिबंधों के कारण चरमरा रही है।

हमला

ईरान खाड़ी देशों को जमकर बना रहा है निशाना

ईरान खाड़ी के सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान पर भीषण हमले कर रहा है। अकेले UAE पर 2,000 से अधिक हमले हुए हैं। इन देशों ने कई हफ्तों तक सतर्क रुख अपनाया और तनाव बढ़ने के खिलाफ सभी पक्षों को चेतावनी दी। हालांकि, अब UAE, सऊदी, बहरीन और कतर ने अब अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना शुरू कर दिया है, क्योंकि ईरान इन देशों पर हमले करने से पीछे नहीं हट रहा है।

कारण

ईरान के खिलाफ क्यों बदला सऊदी और UAE का रुख?

एक वरिष्ठ खाड़ी राजनयिक ने टाइम्स ऑफ इजरायल से कहा कि खाड़ी देश ईरान पर हमले के बजाए कूटनीति पर जोर दे रहे थे, लेकिन ईरान की आक्रामकता ने यह सोच बदल दी। खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे और शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों ने सरकारों को झकझोर दिया है। इन हमलों में कतर के रास लाफान गैस भंडार पर किया हमला भी शामिल है। इन हमलों ने खाड़ी देशों के आर्थिक आधार को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।

महंगा

खाड़ी देशों को संयम बरतना पड़ रहा महंगा

ईरान ने होर्मूज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। यह समुद्री रास्ता दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा मार्ग है। ईरान ने यहां से गुजरने पर ट्रांजिट फीस लगाने का संकेत भी दिया है। तेल-समृद्ध खाड़ी देशों के लिए अब संयम बरतना काफी महंगा साबित हो रहा है। उनके व्यापार के साथ आयात और निर्यात पूरी तरह से बाधित हो गए हैं। ऐसे में सऊदी अरब और UAE ने अब सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।

दबाव

खाड़ी देश अमेरिका पर बना रहे यह विशेष दबाव

खाड़ी देश अमेरिका पर दबाव बना रहे हैं कि युद्ध का अंत ऐसा हो जिसमें ईरान की सैन्य ताकत कमजोर हो जाए। खाड़ी के एक अधिकारी ने कहा कि अगर ईरान को ऐसे ही छोड़ दिया गया तो यह बहुत बड़ी गलती होगी। खाड़ी देश अमेरिका से नाराज भी है। उन्होंने युद्ध की शुरुआत में अमेरिका को ईरान की जवाबी कार्रवाई पर चेताया था, लेकिन ट्रंप ने उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिया और बाद में वह कुछ नहीं कर पाए।

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