LOADING...
इजरायल-अमेरिका के खिलाफ जारी युद्ध में UAE को सर्वाधिक नुकसान क्यों पहुंचा रहा है ईरान?
इजरायल-अमेरिका के खिलाफ जारी युद्ध में UAE को सर्वाधिक नुकसान पहुंचा रहा है ईरान

इजरायल-अमेरिका के खिलाफ जारी युद्ध में UAE को सर्वाधिक नुकसान क्यों पहुंचा रहा है ईरान?

Mar 17, 2026
06:49 pm

क्या है खबर?

अमूमन पर्यटकों से आबाद रहने वाले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई, अबू धाबी, अजमान और शारजाह जैसे प्रमुख शहर इस समय ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से जूझ रहे हैं। इन शहरों में हवाई रक्षा प्रणालियां सक्रिय हैं और लड़ाकू विमान उड़ते नजर आ रहे हैं। यह सब 28 फरवरी को इजरायल-अमेरिका के ईरान पर संयुक्त हमला करने के बाद शुरू हुआ है। ऐसे में आइए जानते हैं आखिर ईरान UAE पर सर्वाधिक हमले क्यों कर रहा है।

हालात

ईरान ने UAE पर दागी हैं 298 बैलिस्टिक मिसाइलें

इजरायल-अमेरिका के हमले में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं, जिनमें कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाया गया है। हालांकि, अन्य किसी भी खाड़ी देश की तुलना में UAE को सर्वाधिक नुकसान उठाना पड़ा है। अबू धाबी के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 15 मार्च तक UAE ने 298 बैलिस्टिक मिसाइल, 15 क्रूज मिसाइलों और 1,606 ड्रोनों का सामना किया है।

नुकसान

UAE को कितना हुआ नुकसान?

ये आंकड़े कतर, बहरीन, सऊदी अरब या कुवैत जैसे पड़ोसी देशों पर ईरान के हमलों से कहीं ज्यादा हैं। ईरानी हमलों में बुर्ज अल अरब के पास स्थित इमारतों को खासा नुकसान पहुंचा है। अबू धाबी और दुबई में कम से कम 6 लोगों की मौत हुई है। इसी तरह एक भारतीय नागरिक भी घायल हुआ है। इन हमलों के कारण उड़ाने प्रभावित होने से अब ये शहर पर्यटकों की राह देखते नजर आ रहे हैं।

Advertisement

कारण

अमेरिकी वायुसेना का अड्डा होना है कारण?

UAE में अल धाफरा वायुसेना अड्डे जैसी प्रमुख अमेरिकी सैन्य सुविधाएं हैं, जिससे यह अमेरिका पर सीधे हमला किए बिना अमेरिकी हितों पर हमला करने का लक्ष्य बन गया। ईरान आसानी से अमेरिका तक नहीं पहुंच सकता, इसलिए इस क्षेत्र में उसका सहयोगी देश ईरान के हमलों का सामना कर रहा है। इसी तरह UAE, अमेरिका का प्रमुख रक्षा साझेदार भी है। दोनों के बीच 2024 में उन्नत हथियारों और संयुक्त अभ्यासों का एक समझौता भी हुआ था।

Advertisement

उद्देश्य

UAE पर हमला करने के पीछे ईरान का उद्देश्य

UAE पर हमला करके ईरान अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए लागत बढ़ाना और तेहरान के खिलाफ अभियानों में उनके समर्थन को कमजोर करना चाहता है। लेबनानी पत्रकार नदीम कोटेच ने एक्स पर लिखा, 'UAE पर हमला करने की ईरानी रणनीति अचानक नहीं थी। खामेनेई की हत्या के बाद से ईरान द्वारा दागे गए 65 प्रतिशत मिसाइल और ड्रोन UAE को निशाना बनाकर दागे गए थे। यह कोई संयोग नहीं है। यह एक सोची-समझी साजिश है।'

जुड़ाव

UAE का खाड़ी और पश्चिमी देशों के बीच सेतु का काम करना

ईरान के UAE पर अधिक हमले करने का अन्य कारण UAE के खुद को पश्चिम और खाड़ी देशों के बीच एक सेतु के रूप में स्थापित करना है। यह वित्त, पर्यटन, प्रौद्योगिकी और व्यापार का एक वैश्विक केंद्र है। ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र में पश्चिमी प्रभाव का विरोध करता रहा है। इस क्षेत्र में अमेरिका का एक करीबी सहयोगी होना उसकी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के लिए एक चुनौती है। ऐसे में ईरान ने उसे अपना निशाना बनाया है।

प्रयास

ईरान ने किया वैश्विक व्यापार को बाधित करने का प्रयास

ईरान ने न केवल अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया, बल्कि वैश्विक व्यापार को बाधित करने, तेल बाजारों पर दबाव डालने और एक स्थिर सुरक्षित ठिकाने के रूप में UAE की छवि को चुनौती देने के लिए बंदरगाहों (जेबेल अली और फुजैराह बंदरगाह) और हवाई अड्डों जैसे आर्थिक केंद्रों पर भी हमला किया। दुबई और अबू धाबी लंबे समय से प्रमुख पर्यटन केंद्र रहे हैं, लेकिन अब उसकी एक सुरक्षित पर्यटन स्थल के रूप में छवि धूमिल होने लगी है।

बयान

दुबई की छवि और पर्यटन को नुकसान पहुंचा रहे हैं हमले

भू-राजनीतिक विश्लेषक शाईल बेन-एप्रैम ने एक्स पर लिखा, 'ईरान के ये हमले दुबई की छवि और पर्यटन को नुकसान पहुंचाते हैं। पाम जुमेराह और बुर्ज खलीफा के आसपास प्रतिष्ठित स्थलों पर हमला करके ईरान का उद्देश्य वैश्विक निवेश और पर्यटन के लिए एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में दुबई की प्रतिष्ठा नष्ट करना है। UAE में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर काफी प्रभाव है और ईरान हमला कर अमेरिका पर युद्ध रोकने के लिए दबाव बनाना चाहता है।'

संबंध

UAE और इजरायल के बीच अब्राहम समझौता भी कारण

इसके अलावा, UAE-इजरायल संबंधों को सामान्य बनाने वाला 2020 का अब्राहम समझौता एक विवाद का मुद्दा बना हुआ है। ईरान इन समझौतों पर हस्ताक्षर को विश्वासघात मानता है, क्योंकि इससे एक अरब देश उसके कट्टर दुश्मन के साथ जुड़ गया है। इसी तरह अमेरिकी टोमहॉक मिसाइल के हमले में 165 स्कूली छात्राओं की माैत के मामले में ईरान का मानना है कि वह मिसाइल UAE से ही दागी गई थी। ऐसे में वह UAE से बदला ले रहा है।

Advertisement