सिंगापुर वर्तमान में दुनिया में सबसे खराब वायु गुणवत्ता वाला देश क्यों बन गया?
क्या है खबर?
दक्षिण-पूर्वी एशिया में फैले भीषण पर्यावरणीय संकट के कारण दुनिया के सबसे विकसित और अमीर देशों में से एक सिंगापुर इस समय दुनिया का सबसे प्रदूषित देश बन गया है। स्विट्जरलैंड के रियल-टाइम एयर क्वालिटी ट्रैकर IQAir की वैश्विक रैंकिंग में सिंगापुर शीर्ष पर पहुंच गया है, जहां की हवा पूरी तरह से जहरीली धुंध की मोटी चादर में लिपटी हुई है। पूरे देश का प्रदूषक मानक सूचकांक (PSI) 'अस्वस्थ' श्रेणी में बना हुआ है। आइए इसका कारण जानते हैं।
कारण
क्या है इस भीषण प्रदूषण के मुख्य कारण?
सिंगापुर का 24 घंटे का PSI 200 के पार पहुंच गया है। साल 2019 के बाद यह पहली बार है जब पूरे देश में वायु गुणवत्ता इस कदर खतरनाक स्तर पर पहुंची है।
इसका कारण पड़ोसी देश इंडोनेशिया से आने वाला जहरीला धुआं है।
दरअसल, इंडोनेशिया के सुमात्रा और कलिमंतन द्वीपों पर ताड़ के तेल और लुगदी के बड़े-बड़े बागानों को साफ करने के लिए हर साल जंगलों और दलदली जमीनों में अवैध रूप से आग लगाई जाती है।
स्थिति
अल नीनो ने बिगाड़ी स्थिति
इस साल इंडोनेशियाई जंगलों में आग के सैकड़ों 'हॉटस्पॉट्स' सक्रिय हैं। दक्षिण-पूर्वी मानसून की तेज हवाएं इस विशाल और घने जहरीले धुएं को सीधे उड़ाकर सिंगापुर की ओर ले आ रही हैं।
इसी तरह इस साल का मौसम चक्र तीव्र अल नीनो पैटर्न से प्रभावित है।
इसके कारण पूरे दक्षिण-पूर्वी एशियाई क्षेत्र में लंबे समय से भीषण सूखा पड़ा हुआ है और बारिश न होने से हवा में प्रदूषण के कण स्थायी रूप से जमा हो गए हैं।
बारिश
सिंगापुर में 80 प्रतिशत कम हुई बारिश
द गार्जियन के अनुसार, सिंगापुर के नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान में सहायक प्रोफेसर वांग जिंग्यू ने बताया कि जून से सिंगापुर-इंडोनेशिया में बारिश सामान्य से लगभग 80 प्रतिशत कम रही है।
शुष्क मौसम और अल नीनो के संयोजन ने इंडोनेशिया भर में आग की स्थिति को और भी बदतर बना दिया है।
धुएं ने सिंगापुर के अलावा कई अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित किया है, जिनमें प्रायद्वीपीय मलेशिया, सारावाक, कालीमंतन और सुमात्रा के कुछ हिस्से शामिल हैं।
प्रभाव
धुएं के कारण कैसे हैं हालात?
सिंगापुर के राष्ट्रीय स्वास्थ्य विभाग (NEA) ने लोगों को सलाह दी है कि जब एक घंटे का PM2.5 स्तर उच्च हो, तो अगले एक घंटे तक बाहरी गतिविधियों को कम करें।
बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और हृदय या फेफड़ों की पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को PM2.5 का स्तर उच्च होने पर बाहरी गतिविधियों से बचने की सलाह दी गई है।
ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर क्रिस कार्लस्टन के अनुसार, प्रदूषण मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है।
मलेशिया
मलेशिया में बंद किए गए स्कूल
इस प्रदूषण का असर केवल सिंगापुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है।
सिंगापुर की सीमा से सटे पड़ोसी देश मलेशिया में हालात इतने बदतर हो गए हैं कि वहां की सरकार ने 20 लाख से अधिक छात्रों की सुरक्षा के लिए सैकड़ों स्कूलों, किंडरगार्टन और डे-केयर सेंटर्स को बंद करने का आदेश दे दिया।
वर्तमान में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है।
खतरा
क्या प्रदूषण का F1 रेस पर भी है खतरा?
यह वायु संकट ऐसे समय में आया है जब सिंगापुर फॉर्मूला वन ग्रैंड प्रिक्स (F1) हो रही है। इसमें 3 लाख दर्शकों के जुटने की उम्मीद है।
एथलीटों पर इस जहरीली हवा का बड़ा असर हो सकता है।
हालांकि, F1 के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) स्टेफानो डोमेनेकाली ने स्पष्ट किया है कि रेस अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगी। स्थानीय प्रशासन ने दर्शकों के लिए भारी मात्रा में फेस मास्क (N95) और मेडिकल सहायता काउंटरों की व्यवस्था की है।