#NewsBytesExplainer: दर्जनों अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर क्यों निकला अमेरिका, क्या होगा असर?
क्या है खबर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और विवादित फैसला लिया है। उन्होंने अमेरिका को 60 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकालने वाले आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े संगठन भी शामिल हैं। ट्रंप का कहना है कि इन संगठनों का कामकाज और एजेंडा अमेरिकी हितों के अनुरूप नहीं है। इससे पहले पिछले साल अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी छोड़ दिया था। आइए फैसले की वजह और असर समझते हैं।
संगठन
किन-किन संगठनों से बाहर निकला अमेरिका?
अमेरिका कुल 66 संगठनों से बाहर निकला है। इनमें 31 ऐसे संगठन हैं, जो UN से जुड़े हुए हैं। इनमें UN फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) भी शामिल है, जो जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने के लिए मुख्य वैश्विक समझौता है। इसके अलावा अमेरिका लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के लिए काम करने वाले UN महिला और परिवार नियोजन से जुड़े UN पॉपुलेशन फंड (UNFPA) से भी अलग हो गया है।
सौर
भारत-फ्रांस के अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन से भी अलग हुआ अमेरिका
अगर UN से गैर-संबंधित संस्थाओं की बात करें तो अमेरिका अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन से भी अलग हो गया है। इसका स्थापना भारत और फ्रांस ने मिलकर स्वच्छ ऊर्जा की पहल को लेकर की थी। इसके अलावा इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर और इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज जैसे बड़े पर्यावरण संगठनों की सदस्यता भी अमेरिका ने छोड़ दी है। सूची में कई संगठन, एजेंसियां और आयोग भी शामिल हैं, जिसका अब अमेरिका सदस्य नहीं है।
वजह
अमेरिका ने क्यों उठाया ये कदम?
व्हाइट हाउस ने कहा कि यह फैसला उन संस्थाओं को लेकर लिया गया है, जो अब अमेरिका के राष्ट्रीय हितों की सेवा नहीं करती हैं। व्हाइट हाउस ने कहा, "ये निकासी उन अंतरराष्ट्रीय संगठनों, संधियों और सम्मेलनों की व्यापक समीक्षा के बाद हुई हैं, जिन्हें अमेरिका से समर्थन मिलता है। इनमें से कई संस्थाएं अमेरिकी स्वतंत्रता को कमजोर करती हैं और ऐसे वैश्विक एजेंडा को बढ़ावा देती हैं, जो अमेरिकी प्राथमिकताओं से टकराते हैं।"
बयान
ट्रंप ने फैसले पर क्या कहा?
ट्रंप ने फैसले के पीछे 'ग्लोबलिस्ट एजेंडा' को वजह बताया। उन्होंने कहा, "ये निकासी अमेरिकी करदाताओं की फंडिंग और उन संस्थाओं में भागीदारी को खत्म कर देंगी, जो अमेरिकी प्राथमिकताओं के बजाय ग्लोबलिस्ट एजेंडा को बढ़ावा देती हैं, या जो महत्वपूर्ण मुद्दों को अक्षमता से या अप्रभावी ढंग से संभालती हैं। इससे अमेरिकी करदाताओं के पैसे को संबंधित मिशनों का समर्थन करने के लिए बेहतर तरीके से आवंटित किया जा सकेगा।"
असर
क्या होगा असर?
इन संगठनों से अमेरिका के बाहर निकलने का तात्कालिक असर फंडिंग पर होगा। इससे संगठनों का कामकाज प्रभावित होगा और वे जलवायु परिवर्तन और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर पहले की तरह प्रभावी काम नहीं कर पाएंगे। राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही कई UN एजेंसियों को अमेरिका द्वारा दिए जाने वाले ज्यादातर योगदान में कटौती कर चुके हैं। इससे कई UN एजेंसियों ने अपने कामकाज का दायरा सीमित किया और बेहद अहम मुद्दों पर ही ध्यान केंद्रित किया।
पिछला कदम
WHO समेत कई संगठन पहले ही छोड़ चुका है अमेरिका
जनवरी, 2025 में अमेरिका ने WHO छोड़ दिया था। तब अमेरिका ने तर्क दिया था कि WHO अमेरिका से अनुचित रूप से भारी फंडिंग की मांग कर रहा है, जो दूसरे देशों की तय राशि के मुकाबले बहुत ज्यादा है। इससे पहले ट्रंप ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए UN एजेंसी (UNRWA), UN मानवाधिकार परिषद और UN की सांस्कृतिक एजेंसी UNESCO जैसी एजेंसियों के लिए भी फंडिंग बंद कर दी थी।