कौन थे लोबसांग रंगजेन, जिन्होंने UN मुख्यालय के बाहर किया आत्मदाह?
क्या है खबर?
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर एक शख्स ने खुद को आग लगा ली। सूचना मिलते ही पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे गंभीर रूप से झुलसे शख्स को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित की पहचान 52 वर्षीय लोबसांग रंगजेन के तौर पर हुई है, जो 20 साल से अमेरिका में रहकर कैब चलाने का काम करता था।
घटना
15 सेकंड के भीतर ही बचावकर्मियों ने बुझाई आग
पुलिस के मुताबिक, यह घटना शाम करीब 7 बजे ईस्ट 42वीं स्ट्रीट और फर्स्ट एवेन्यू के पास हुई। वीडियो फुटेज में रंगजेन खुद को आग लगाने से पहले फुटपाथ पर तिब्बती झंडा रखता हुआ देखा गया। इसके फौरन बाद बचावकर्मी भी पहुंच गए और आग बुझाई। पुलिस ने बताया कि उसे बेलेव्यू अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान रंगजेन की मौत हो गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
झंडा
घटनास्थल से नारे लिखे पर्चे बरामद
घटनास्थल से सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि रंगजेन पारंपरिक बौद्ध भिक्षु जैसे वस्त्र पहने दिख रहा है। उसने पहले फुटपाथ पर तिब्बती झंडा रखा और फिर खुद को आग लगा ली। घटना के बाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया। घटनास्थल पर बिखरे कागजों पर 'चीन तिब्बत से बाहर जाए' लिखा था, जो तिब्बत की आजादी के आंदोलन से जुड़ा एक नारा है।
परिचय
कौन था रंगजेन?
रंगजेन के दोस्त और साथी कैब ड्राइवर लोबसांग पालजोर ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि वे स्थानीय तिब्बती समुदाय के जरिए रंगजेन को जानते थे। पालजोर ने कहा कि रंगजेन अहिंसक आंदोलन के लिए प्रतिबद्ध थे और लंबे समय से एक आजाद तिब्बत के लक्ष्य का समर्थन कर रहे थे। वहीं, वॉयस ऑफ तिब्बत ' ने कहा कि तिब्बती कार्यकर्ता रंगजेन ने तिब्बत की आजादी के लिए अपील करने के बाद न्यूयॉर्क में UN मुख्यालय के बाहर आत्मदाह किया।
आंकड़े
2009 से 150 से ज्यादा तिब्बतियों ने किया आत्मदाह
एडवोकेसी समूह 'फ्री तिब्बत' के अनुसार, मार्च 2009 से चीन के शासन के विरोध में तिब्बत में 150 से ज्यादा लोगों ने आत्मदाह किया है। पहला बड़ा मामला फरवरी, 2009 में सामने आया, जब युवा भिक्षु तपे ने आत्मदाह कर लिया था। मार्च 2011 में किरती मठ के 21 वर्षीय भिक्षु फुंटसोग ने आत्मदाह किया था। समूह का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने अक्सर दलाई लामा की वापसी और ज्यादा अधिकारों और आजादी की मांग की है।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
चीन का कहना है कि 13वीं शताब्दी में युआन राजवंश के समय से तिब्बत चीन का हिस्सा रहा है। चीन के अनुसार, 1951 में हुए समझौते के जरिए तिब्बत आधिकारिक रूप से चीन में शामिल हुआ। वहीं, तिब्बती समुदाय का कहना है कि 1912 में 13वें दलाई लामा ने तिब्बत को स्वतंत्र घोषित किया था और 1951 का समझौता दबाव में हुआ। 1959 में 14वें दलाई लामा भारत आ गए थे और यहीं से तिब्बत की निर्वासित सरकार चलती है।