कांगो में कहर बरपा रहा इबोला का स्ट्रेन, अब तक 906 मामले और 223 संदिग्ध मौत
क्या है खबर?
अफ्रीकी देश कांगो में इबोला वायरस कहर बरपा रहा है। अभी तक देश में 906 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिसमें 223 की मौत हुई है। सभी संदिग्ध मौतों की जांच जारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में यह प्रकोप इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन है। युगांडा भी इसकी चपेट में है। WHO ने बताया कि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए कोई अनुमोदित टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है।
वायरस
अफ्रीका में फैल रही बीमारी
WHO के अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण कैरोलिना गणराज्य (DRC) में इबोला के 125 पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिनमें इटुरी, उत्तरी किवू और दक्षिणी किवू में 17 पुष्ट मौतें हुई हैं। युगांडा में भी इबोला के 7 पुष्ट मामले मिले हैं, जिनमें 3 DRC से आए थे। इनमें एक मौत हुई है। WHO ने बताया कि सामुदायिक संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। संक्रमित लोगों में मरने वालों की दर 30 से 50 प्रतिशत है।
उपचार
फिलहाल 3 दवाओं का चल रही परीक्षण
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी 3 प्रायोगिक दवाओं की पहचान हुई है, जो खतरनाक बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के इलाज में मददगार हैं। इन उपचारों में मैप्प बायोफार्मास्युटिकल द्वारा निर्मित MBP134, रीजेनरॉन द्वारा विकसित मैफ्टीविमैब और गिलियड साइंसेज की एंटीवायरल दवा रेमडेसिविर शामिल हैं। WHO ने बताया कि सभी दवाएं प्रायोगिक चरण में है। रीजेनरॉन ने कहा कि उसकी दवा पहले से कांगो में उपलब्ध है, अगर WHO इसे उपचार अध्ययनों में शामिल करता है तो इसका उपयोग किया जा सकता है।
वैक्सीन
वैक्सीन पर भी चल रहा काम
इबोला से मुकाबले के लिए rVSV बंडीबुग्यो वैक्सीन को इंटरनेशनल एड्स वैक्सीन इनिशिएटिव द्वारा विकसित किया जा रहा है। हालांकि, WHO ने कहा कि मानव परीक्षणों के लिए तैयार होने में 7 से 9 महीने का समय और लग सकता है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया चाडॉक्स1 बुंडीबुग्यो नामक एक अन्य वैक्सीन बना रहे हैं। यह 2-3 महीनों के भीतर परीक्षण के लिए तैयार हो सकती है, हालांकि अभी और पशु परीक्षण की आवश्यकता है।