क्या है ईरान का 'खार्ग' द्वीप और इस पर हमला क्यों नहीं कर रहे अमेरिका-इजरायल?
क्या है खबर?
इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से गत 28 फरवरी को ईरान पर हमला करते हुए व्यापक युद्ध छेड़ दिया। हमले में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों, तेल सुविधाओं और अन्य रणनीतिक संपत्तियों को निशाना बनाया गया है। हालांकि, उत्तरी खाड़ी में स्थित एक छोटा-सा चट्टानी द्वीप 'खार्ग' अब तक इस युद्ध से अछूता रहा है। हालांकि, अब अमेरिका इसे निशाना बनाने पर विचार कर रहा है। आइए जानते हैं खार्ग द्वीप क्या है और इस पर हमला क्यों नहीं हुआ।
द्वीप
क्या है ईरान 'खार्ग' द्वीप?
'खार्ग' ईरान के बुशहर प्रांत के पास फारस की खाड़ी के तट से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित यह छोटा चट्टानी द्वीप है। यहां से ईरान से होने वाले कच्चे तेल का कुल 90 प्रतिशत निर्यात होता है। इसे ईरान की अर्थव्यवस्था का 'पावर हाउस' कहा जाता है। यह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के लिए भी राजस्व का एक प्रमुख स्रोत बना हुआ है। इसके चलते युद्ध के 10 दिन बाद भी यहां कामकाज सुचारू है।
महत्व
ईरान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है 'खार्ग' द्वीप?
ईरान की अर्थव्यवस्था तेल राजस्व पर बहुत अधिक निर्भर करती है, इसलिए खारग द्वीप पर स्थित तेल भंडारण टैंक, पाइपलाइन और टैंकर लोडिंग टर्मिनल सुविधाएं उसके लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहारा हैं। हाल के हफ्तों में इस द्वीप का महत्व बढ़ गया है। युद्ध की शुरुआत से पहले ईरान ने इस द्वीप में उत्पादन बढ़ा दिया था, जिससे उत्पादन लगभग 40 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया था, जो रिकॉर्ड स्तर के करीब है।
कारण
अमेरिका और इजरायल ने इस पर अब तक क्यों नहीं किया हमला?
इस द्वीप पर सुरक्षा के लिए केवल पुराने HAWK मिसाइल सिस्टम तैनात हैं। ऐसे में इसे तबाह करना अमेरिका और इजरायल के लिए कुछ मिनटों का काम है। हालांकि, इसके बाद भी दोनों देश अब तक इस पर हमला करने से बचे हैं। इसका कारण है कि यहां पर हमले से ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाएगी, लेकिन इससे एक बड़ा तनाव भी पैदा हो सकता है और वैश्विक तेल बाजारों को बड़ा झटका लग सकता है।
असर
'खार्ग' द्वीप पर हमला करने का क्या होगा असर?
ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार, 'खार्ग' द्वीप पर हमला करते ही वैश्विक बाजार में तेजी से तेल की किल्लत बढ़ जाएगी। इससे ब्रेंट क्रूड 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। यह स्थिति पूरी दुनिया को भयानक मंदी में झोंक देगी। इसी तरह चीन अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा 14 लाख बैरल तेल रोजाना ईरान से खरीदता है। ऐसे में कोई भी हमला चीन को सीधे तौर पर युद्ध में उतरने का बहाना दे देगा।
अन्य
खाड़ी देशों पर हमला कर सकता है ईरान
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल जानते हैं कि 'खार्ग' पर हमला करने से ईरान खाड़ी देशों के तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। इससे दुनिया में तेल की कीमतों और बढ़ जाएगी। ऐसे में गरीब और विकासशील देशों इस सैन्य अभियान के खिलाफ एकजुट होने का खतरा बढ़ जाएगा और हालात तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ जाएंगे। इसी तरह यह कदम ईरान में भविष्य में किसी भी सरकार को कमजोर करने वाला होगा।
मांग
इजरायल ने उठाई 'खार्ग' द्वीप पर हमला करने की मांग
इजरायल के विपक्षी नेता यायर लैपिड ने 'खार्ग' द्वीप और ईरान के तेल उद्योग पर हमले का आह्वान किया है। उनका कहना है कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पंगु हो जाएगी और शासन गिर जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और इजरायल का लक्ष्य सत्ता परिवर्तन को संभव बनाना है, लेकिन इसके लिए ईरान को पूरी तरह तबाह नहीं किया जा सकता है। यही कारण है कि इस द्वीप को अभी तक हमलों से दूर रखा गया है।
सवाल
क्या 'खार्ग' द्वीप पर हमले की योजना बना रहा अमेरिका?
वाईनेट न्यूज के अनुसार, युद्ध के दूसरे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन 'खार्ग' द्वीप पर हमला करने की योजना बना रहा है। ईरान और इराक पर पेंटागन के पूर्व सलाहकार माइकल रुबिन ने कहा कि 'खार्ग' पर हमला करने से ईरान की अपने सैन्य तंत्र को वित्त पोषित करने और घरेलू नियंत्रण बनाए रखने की क्षमता काफी कमजोर हो सकती है। इस पर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में भी चर्चा हुई है।