अमेरिकी सेना 20 साल बाद इराक से लौटी, क्या फिर मजबूत होंगे ईरान समर्थित संगठन?
क्या है खबर?
करीब 20 साल बाद अमेरिका की सेना इराक से लौट रही हैं। आज अमेरिकी सेना ने इराक में अपने आखिरी अड्डे को भी खाली कर दिया है। 2024 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में सेना हटाने को लेकर सहमति बनी थी। अमेरिकी सेना के इराक छोड़ने के साथ ही चिंताएं बढ़ रही हैं क्या ईरान समर्थित चरमपंथी संगठन फिर से उठ खड़े होंगे। आइए चिंताएं और इनकी वजह समझते हैं।
प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री बोले- ईरान समर्थक समूह हथियार सौंप देंगे
इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने कहा कि अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के इराक से बाहर निकलने के बाद ईरान समर्थक समूह अपने हथियार सरकार को सौंप देंगे। हालांकि, विशेषज्ञों की इस पर अलग राय है।
समाचार एजेंसी AFP से कई वरिष्ठ इराकी अधिकारियों ने कहा कि ईरान यह स्वीकार नहीं करेगा कि गुट अपने हथियार सौंप दें, खासकर क्षेत्रीय युद्ध के बीच। ईरानी अधिकारियों ने भी ऐसे ही संकेत दिए हैं।
विशेषज्ञ
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
इराकी राजनीतिक विश्लेषक साजिद जियाद ने कहा, "अगर अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो जाता है, तो इस मुद्दे से निपटना बहुत आसान हो जाएगा। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक संघर्ष चल रहा है, वे अपनी रणनीतिक क्षमताओं को नहीं छोड़ सकते, जिसमें इराकी समूह और इराक और क्षेत्र में अमेरिकी हितों पर हमला करने की उनकी क्षमता शामिल है। यह एक मुश्किल स्थिति है, क्योंकि ईरान 'अस्थिर इराक' नहीं चाहता है।"
बयान
जियाद बोले- सेना हटने के बाद ज्यादा उम्मीद नहीं रखनी चाहिए
जियाद ने आगे कहा, "ज्यादा उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। हमें निरस्त्रीकरण तो नहीं मिलने वाला, लेकिन किसी न किसी तरह की प्रगति और कोई योजना तो होनी ही चाहिए। संभवतः जो होने वाला है वह यह कि समाधान की दिशा में प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, लेकिन इसमें समय और विश्वास निर्माण के उपाय की जरूरत होगी। ईरान समर्थित समूहों को लगता है कि सरकार उन्हें अमेरिका से बचाने में असमर्थ है और उन्हें बोझ के रूप में देखती है।"
हथियार
हथियार डालने को तैयार नहीं गुट
कुछ समूह ऐसे हैं, जिन्होंने हथियार डालने से इनकार कर दिया है।
सशस्त्र समूह काताएब सैय्यद अल-शुहादा के प्रवक्ता काजेम अल-फार्तोसी ने कहा, "हम सरकार के साथ टकराव नहीं चाहते क्योंकि इसमें कोई भी विजेता नहीं होगा। लेकिन हमारे हथियार अनमोल हैं, इसलिए हमने कहा है कि ये हथियार संप्रभुता के बदले में दिए जाएंगे, जिसमें विदेशी सैनिकों की वापसी और अमेरिकी राजनीतिक और आर्थिक हस्तक्षेप का अंत शामिल है।"
ईरान
विश्लेषक बोले- ईरान समर्थित समूह और ताकतवर महसूस करेंगे
फ्रांस24 से राजनीतिक विश्लेषक अहमद यूनिस ने कहा, "चिंताजनक बात यह नहीं है कि ईरान सीधा हस्तक्षेप करेगा, बल्कि यह संभावना है कि अमेरिकी सेना की अनुपस्थिति में ईरान समर्थक समूह ज्यादा सशक्त महसूस करेंगे। ये समूह नीतियों को आकार देने और संस्थानों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का प्रयास कर सकते हैं।"
रिपोर्ट में इराकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि अमेरिकी सेना की वापसी से इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों को नया जीवन मिलने का खतरा है।
उपस्थिति
2003 से इराक में अमेरिकी सेना की उपस्थिति
अमेरिकी सेना ने 2003 में सद्दाम हुसैन के शासन को उखाड़ फेंकने के लिए 'वेपंस ऑफ मास डिस्ट्रक्शन' का हवाला देकर इराक पर हमला किया था।
इसके बाद वहां शिया-नेतृत्व वाली सरकार बनी और 2011 के अंत तक अमेरिकी सेना भी रही।
हालांकि, 2014 में ISIS के उभार के चलते अमेरिकी सेना को वापस लौटना पड़ा। आखिरकार अब अमेरिकी सेना इराक से पूरी तरह लौट गई है।
इस दौरान करीब 4,500 अमेरिकी सैनिक इराक में मारे गए।