ताइवान को 98,000 करोड़ रुपये के हथियार देगा अमेरिका, भड़क सकता है चीन
क्या है खबर?
ताइवान को लेकर अमेरिका ने ऐसा कदम उठाया है, जो चीन को नाराज कर सकता है। अमेरिका ने बड़ा और बेहद संवेदनशील फैसला लेते हुए ताइवान को अब तक की सबसे बड़ी हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। इस सैन्य समझौते को ताइवान की रक्षा क्षमता के लिहाज से गेमचेंजर माना जा रहा है। अमेरिका ने ये कदम ऐसे वक्त उठाया है, जब चीन लगातार ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है और सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं।
समझौता
ताइवान को कौन-कौनसे हथियार देगा अमेरिका?
पैकेज में 82 हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) शामिल हैं, जो तेज तैनाती और सटीक हमलों के लिए जाने जाते हैं। यह ट्रक पर तैनात होने वाले हल्का रॉकेट लॉन्चर है, जो लंबी दूरी के तीव्र हमलों में इस्तेमाल होता है। इसके साथ 420 ATACMS मिसाइलें भी दी जाएंगी, जो दुश्मन के ठिकानों को भीतर तक निशाना बना सकती हैं। ताइवान ने कहा कि ये समझौता राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते द्वारा घोषित किए गए पूरक सैन्य बजट का हिस्सा है।
अन्य उपकरण
ताइवान को अमेरिका से ये हथियार भी मिलेंगे
सौदे के तहत अमेरिका 1,545 TOW-2B एंटी-टैंक मिसाइलें और 1,050 जैवलिन मिसाइलें ताइवान को देगा। ये बख्तरबंद वाहनों को तबाह करने में सक्षम हैं। इसके अलावा हार्पून एंटी-शिप मिसाइलों से जुड़े उपकरण भी दिए जाएंगे, जो नौसेना को मजबूत करेंगे। समझौते में ALTIUS-600M और 700M लॉइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन भी शामिल हैं, जो देर तक हवा में मंडराकर लक्ष्य पर हमला करते हैं। सैन्य सॉफ्टवेयर और डिजिटल सिस्टम और हेलिकॉप्टर स्पेयर पार्ट्स भी ताइवान को मिलने जा रहे हैं।
अहमियत
क्या अहम है समझौते का समय?
ये घोषणा ऐसे वक्त की गई है, जब अमेरिका और चीन में टैरिफ को लेकर पहले से ही तनातनी चल रही है। हाल ही में ताइवान के विदेश मंत्री लिन चिआ लुंग ने अमेरिका का दौरा किया था, जिसकी बहुत कम जानकारी सामने आई थी। वहीं, जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची द्वारा ताइवान को लेकर की गई टिप्पणी पर भी खूब विवाद हुआ था। ताइवान का मानना है कि चीन 2027 तक उस पर हमला कर सकता है।
चीन
समझौते पर क्या रही चीन की प्रतिक्रिया?
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "ताइवान की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी का हथियारों के सहारे एकीकरण का विरोध और स्वतंत्रता की कोशिश करना नाकाम होने वाला है।" चीन ने फिर दोबराया कि ताइवान उसके क्षेत्र का हिस्सा है और उसे अलग होने की अनुमति नहीं दी जा सकती। चीन लगातार ताइवान के तट के पास सैन्य अभ्यास करता रहा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ताइवान के चीन के साथ एकीकरण को 'ऐतिहासिक अनिवार्यता' बता चुके हैं।
विवाद
चीन और ताइवान में क्या विवाद है?
ताइवान चीन के दक्षिण-पूर्वी तट से लगभग 160 किलोमीटर दूर स्थित एक द्वीप है। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद चीन पर कम्युनिस्ट पार्टी का कब्जा हो गया और नेशनलिस्ट पार्टी (कुओमिंतांग) के लोग चीन छोड़कर ताइवान चले गए। चीन ताइवान को खुद से अलग हुए एक प्रांत मानता है और उस पर अधिकार जताता है। वहीं, ताइवान खुद को स्वतंत्र देश मानता है, जिसकी अपनी सरकार और संविधान है। दुनिया के 13 देश ताइवान को संप्रभु देश की मान्यता देते हैं।