ईरान के संदिग्ध साइबर हमले के बाद 4 दिन तक बंद रहा ब्रिटेन का ऊर्जा संयंत्र
क्या है खबर?
ब्रिटेन में स्थित एक ऊर्जा संयंत्र को साइबर हमले का शिकार होने के बाद कम से कम 4 दिनों के लिए पूरी तरह बंद करना पड़ा था। ब्रिटिश मीडिया द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना पिछले महीने घटित हुई थी, जिसे हाल के समय का सबसे सफल साइबर हमला माना जा रहा है और इसके तार ईरान से जुड़े होने का गहरा संदेह है। हालांकि, इस घटना के बाद ब्रिटिश सरकार ने इसका विवरण सार्वजनिक नहीं किया है।
कारण
सुरक्षा कारणों से मामले को रखा गया गुप्त
रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से ब्रिटिश सरकार, BBC और टेलीग्राफ ने प्रभावित ऊर्जा संयंत्र के नाम का खुलासा नहीं किया है।
अधिकारियों के मुताबिक, यह ऊर्जा संयंत्र अपेक्षाकृत छोटा था। यही वजह रही कि इस हैकिंग से ब्रिटेन की व्यापक पावर ग्रिड और ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।
यह हमला उसी समय पर हुआ जब अमेरिका की जल प्रणालियों पर सिलसिलेवार हमले किए गए थे।
उद्देश्य
ब्रिटेन को डराना था मकसद, निशाने पर हैं यूरोप के अन्य देश
ब्रिटिश खुफिया अधिकारियों का मानना है कि इस हमले का मुख्य उद्देश्य यह साबित करना था कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े हैकर्स ब्रिटेन की संवेदनशील प्रणालियों में घुसपैठ कर उसके बुनियादी ढांचे को ठप कर सकते हैं।
केवल ब्रिटेन ही नहीं, बल्कि जर्मनी, फिनलैंड, पोलैंड, बेल्जियम और अल्बानिया में भी संदिग्ध साइबर हमले दर्ज किए गए हैं, जिनके तार ईरानी हैकर्स से जुड़े होने की बात सामने आई है।
समानता
अमेरिका की जल प्रणालियों पर भी हुआ बड़ा हमला
ब्रिटेन के ऊर्जा संयंत्र पर हुए इस हमले के साथ अमेरिका की जल प्रणालियों पर भी समन्वित साइबर हमले किए गए।
इसके कारण अमेरिका के 12 राज्यों में पीने के पानी और अपशिष्ट जल उपचार सुविधाएं प्रभावित हुईं।
संघीय जांच ब्यूरो (FBI) के अनुसार, मिनिसोटा (जहां 26 जुलाई को पहला हमला दिखा), मिशिगन, जॉर्जिया, साउथ डकोटा और न्यू जर्सी जैसे राज्यों की जल प्रणालियों को भी निशाना बनाया गया था, जिनका जुड़ाव ईरान से होने का दावा है।