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पाकिस्तान पहुंचे तुर्की और चीन के सैन्य विमान, क्या की गई है हथियारों की आपूर्ति?
पाकिस्तान पहुंचे तुर्की और चीन के सैन्य विमान

पाकिस्तान पहुंचे तुर्की और चीन के सैन्य विमान, क्या की गई है हथियारों की आपूर्ति?

Aug 25, 2026
05:56 pm

क्या है खबर?

पाकिस्तान ने चोरी-छिपे अपनी सैन्य ताकत बढ़ाना शुरू कर दिया है। ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) और फ्लाइट ट्रैकिंग नेटवर्कों के अनुसार, हाल ही में तुर्की और चीन के कई बड़े सैन्य परिवहन विमानों ने पाकिस्तान के तीन प्रमुख एयरबेस पर एक के बाद एक लैंडिंग की है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन विमानों के जरिए पाकिस्तान को खतरनाक मानवरहित हवाई विमान (UAV), आत्मघाती ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम की आपूर्ति की गई है।

विवरण

उड़ान संबंधी विवरण और व्यवस्था

OSINT और फ्लाइट ट्रैकिंग नेटवर्क के डाटा के अनुसार, तुर्की और चीनी वायुसेना के विमानों ने 19 से 21 अगस्त के बीच लगातार पाकिस्तान के लिए उड़ानें भरीं।

इस अभियान के लिए तुर्की वायु सेना (TuAF) ने लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस परिवहन विमान और एयरबस A-400M एटलस एयरलिफ्टर का इस्तेमाल किया।

इन विमानों को पाकिस्तान में वायुसेना के रावलपिंडी स्थित नूर खान, कराची में मसरूर और चकवाल में मुरीद एयबेस पर उतारा गया था।

हथियार

विमानों से आए ये घातक हथियार

इन विमानों पर तुर्की या पाकिस्तान ने कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन रक्षा सूत्रों की माने तो इन विमानों में सैटेलाइट कम्युनिकेशन (SATCOM) टर्मिनलों से लैस उन्नत बायराकटार TB2 ड्रोन शामिल हैं, जो नजरों से दूर जाकर हमला करने में सक्षम है।

इसके अलावा, बायकार यीहा-3 लोइटरिंग मुनिशन्स और असिस्टगार्ड सोंगर सशस्त्र ड्रोन प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं।

तुर्की के अंका-3 स्टील्थ UCAV और TAI सुपर सिमसेक टेक्टिकल टारगेट ड्रोनों के बेहद संवेदनशील सब-सिस्टम उतारे जाने की भी खबर है।

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समझौता

मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के बाद पहुंचे विमान

यह गुप्त ऑपरेशन अचानक नहीं हुआ है। हाल ही में 7 अगस्त को पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हस्ताक्षरित 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के तुरंत बाद ये उड़ानें शुरू हुई हैं।

इस नए कूटनीतिक गठबंधन के तहत तुर्की आधुनिक सैन्य टेक्नोलॉजी और ड्रोन मुहैया करा रहा है।

सऊदी अरब भारी-भरकम वित्तीय संसाधन दे रहा है।

इसी तरह पाकिस्तान अपनी विशाल सेना के जवानों को इस त्रिपक्षीय सुरक्षा ढांचे में तैनात कर रहा है।

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प्रभाव

ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान की सैन्य खरीद रणनीति पर इसका प्रभाव

पाकिस्तान की इस आक्रामक हथियार खरीद के पीछे मुख्य रूप से मई 2025 में भारत के साथ हुआ 'ऑपरेशन सिंदूर' है।

उस चार दिवसीय टकराव के दौरान भारतीय सेना की इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमता और गहरी हवाई सुरक्षा के आगे पाकिस्तान का सिस्टम पूरी तरह विफल हुआ था।

उसी कमजोरी को दूर करने के लिए पाकिस्तान अब तेजी से AI-निर्देशित तुर्की ड्रोनों को अपनी नई सैन्य क्षमता में शामिल कर रहा है।

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