ट्रंप ने ईरान को शांति प्रस्ताव पर जल्द गंभीर होने को कहा, NATO पर भी बरसे
क्या है खबर?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ईरानी वार्ताकारों को निशाने पर लेते हुए कहा कि वे बर्बादी देखने के बाद भी शांति प्रस्ताव पर गंभीर नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान को जल्द से जल्द गंभीर हो जाना चाहिए, क्योंकि देर होने पर वापसी का कोई रास्ता नहीं है। ट्रंप ने उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) को ईरान युद्ध में साथ न देने पर कहा कि समय को कभी मत भूलना।
बयान
ईरान के वार्ताकार बहुत अजीब हैं- ट्रंप
ट्रंप ने ट्रुथ पर लिखा कि ईरानी वार्ताकार बहुत अलग और अजीब हैं, वे समझौते के लिए मिन्नतें भी कर रहे हैं और सार्वजनिक रूप से प्रस्ताव पर विचार करने की बात करते हैं, जो गलत है। ट्रंप ने लिखा कि ईरान को मिन्नतें करनी चाहिए क्योंकि वे सैन्य रूप से तबाह हो चुके हैं और वापसी की कोई गुंजाइश नहीं है। अगर वे जल्द से जल्द गंभीर नहीं हुए तो बहुत देर हो जाएगी और अंजाम अच्छा नहीं होगा!
बयान
NATO ने कुछ नहीं किया- ट्रंप
ट्रंप ने सैन्य संगठन को लेकर ट्रुथ पर लिखा कि NATO देशों ने ईरान जैसे 'पागल' देश से निपटने में मदद के लिए "बिल्कुल कुछ नहीं" किया है, जो ईरान अब सैन्य रूप से पूरी तरह तबाह हो चुका है। उन्होंने आगे लिखा की अमेरिका को NATO से किसी चीज की जरूरत नहीं है, लेकिन इस "बेहद महत्वपूर्ण" समय को "कभी मत भूलना"! बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप ने NATO से मदद मांगी थी, जो नहीं मिली।
प्रस्ताव
ट्रंप ने क्या रखा है प्रस्ताव?
ट्रंप ने बुधवार को बताया कि वाशिंगटन तेहरान में 'सही लोगों' से बातचीत कर रहा है। उन्होंने युद्धविराम के लिए ईरान के साथ 15 सूत्रीय समझौते का प्रस्ताव रखा है, जिसमें ईरान को अपनी परमाणु क्षमता खत्म करना होगा, परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता जतानी होगी, यूरेनियम संवर्धन नहीं होगा, लगभग 450 किलोग्राम यूरेनियम को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को सौंपना होगा, परमाणु संयंत्रों को नष्ट करना होगा और IAEA को ईरान के अंदर पूर्ण पहुंच देना होगा।
नाराजगी
NATO ने लड़ाई में साथ आने से ट्रंप को क्यों इनकार किया?
ट्रंप ने कहा था कि NATO सहयोगियों को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने में उनकी मदद करनी होगी और अगर वे साथ नहीं आते तो उनका भविष्य बुरा होगा। इस पर NATO सहयोगी देश जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि यह युद्ध NATO का मामला नहीं है, जबकि NATO ने कहा कि सहयोगी देश भूमध्य सागर में अतिरिक्त सुरक्षा के लिए पहले ही कदम उठा चुका है। इसके अलावा, मौजूदा युद्ध के मापदंड NATO चार्टर के नियमों का उल्लंघन दर्शाते हैं।