ट्रंप ने तुर्की में विमान बदलने की बात स्वीकारी, कहा- खुफिया एजेंसियों की सलाह मानता हूं
क्या है खबर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन खबरों पर मुहर लगा दी, जिसमें ईरानी धमकियों के डर से उनको तुर्की में अपना विमान बदलना पड़ा था। ओहायो से लौटने के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनको काफी धमकियां मिलती हैं, इसलिए वह खुफिया एजेंसियों और सैन्य सेवा के नियमों का पालन करते हैं। ट्रंप ने खुद को सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रपति बताते हुए कहा कि वहां कोई खतरा था, जिसके कारण अचानक यह निर्णय लिया गया।
बयान
मैंने ज्यादा जानकारी नहीं ली- ट्रंप
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, "मैं सीक्रेट सर्विस और सेना के निर्देशों का पालन करता हूं। वे चाहते थे कि मैं दूसरी उड़ान, दूसरे विमान से जाऊं... मैं उनकी बात मानता हूं... मुझे लगता है कि वहां कोई खतरा था। मैंने इसके बारे में ज्यादा पूछताछ नहीं की। मुझे बहुत सारी धमकियां मिलती हैं।"
ट्रंप आगे बोले, "मुझे लगता है कि यह अधिक जोखिम में था, क्योंकि वे उसी विमान को निशाना बनाने की अधिक संभावना रखते थे।"
बयान
मैं शायद सबसे प्रभावशाली राष्ट्रपति हूं- ट्रंप
ट्रंप ने आगे कहा कि उन्हें कई ऐसी धमकियां मिल रही हैं जिनके बारे में जनता को पता नहीं है।
उन्होंने कहा, "किसी भी प्रभावशाली राष्ट्रपति को बहुत सारी धमकियों का सामना करना पड़ता है। कम प्रभावशाली राष्ट्रपतियों को कोई खतरा नहीं होता, और मुझे लगता है कि मैं शायद सबसे प्रभावशाली राष्ट्रपति हूं।"
उन्होंने ऐसी धमकियों की चिंता न करते हुए कहा, "चाहे जो भी हो, आप मेरा रवैया जानते ही हैं? मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।"
घटना
क्या है विमान बदलने की घटना?
वाशिंगटन पोस्ट ने खुलासा किया कि पिछले महीने तुर्की में NATO शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप कतर द्वारा दान नई बोइंग 747-8 विमान से अंकारा पहुंचे थे।
वाशिंगटन लौटते समय ईरानी धमकियों के कारण वह पुराने एयरफोर्स वन में दाखिल हुए, लेकिन चुपके से एक खानपान कंटेनर ट्रक में छिपकर छोटे एयरफ़ोर्स C-32A सैन्य जेट में सवार हो गए, जिसकी किसी को खबर नहीं थी।
ब्रिटेन पहुंचने के बाद ट्रंप चोरी-छिपे छोटे विमान से एयरफोर्स वन में सवार हुए थे।