अमेरिकी सेना ने जवानों के फोन-कंप्यूटर में विज्ञापन ट्रैकिंग को किया बंद, जानिए कारण
क्या है खबर?
अमेरिका की सेना ने अपने जवानों और सैन्य कर्मियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फोन और कंप्यूटरों में विज्ञापन ट्रैकर्स को पूरी तरह से बंद कर दिया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने यह कड़ा कदम उन गंभीर चिंताओं के बाद उठाया है, जिसमें सामने आया था कि व्यावसायिक रूप से उपलब्ध लोकेशन डाटा का इस्तेमाल मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में तैनात अमेरिकी सैनिकों को ट्रैक करने और उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।
खतरा
विज्ञापन ट्रैकिंग कैसे बन गई सुरक्षा के लिए खतरा?
इस सुरक्षा कार्रवाई का मुख्य केंद्र मोबाइल एडवरटाइजिंग ID है, जिसे तकनीकी भाषा में MAID कहा जाता है। ये डाटा कंपनियों को किसी भी डिवाइस की पहचान करने में मदद करते हैं।
विभिन्न ऐप्स द्वारा एकत्र किए गए लोकेशन डाटा की मदद से ये कंपनियां सैनिकों की संवेदनशील गतिविधियों को ट्रैक कर रही थीं।
अमेरिकी अधिकारियों को डर है कि इस संवेदनशील लोकेशन डाटा को इकट्ठा करके अन्य कंपनियों या शत्रुतापूर्ण सरकारों को बेचा जा सकता है।
नियम
किन पर लागू हुआ यह नियम?
रॉयटर्स के अनुसार, इस प्रतिबंध से अमेरिकी सेना की कई मुख्य शाखाएं प्रभावित हुई हैं।
अमेरिकी वायुसेना ने लगभग 2 महीने पहले ही अपने कंप्यूटर और मोबाइल फोन पर विज्ञापन ट्रैकर्स को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है।
स्पेशल ऑपरेशंस कमांड ने भी हाल ही में अपने सभी विंडोज संचालित उपकरणों पर इन ट्रैकर्स को बंद किया है।
इसी तरह अमेरिकी थल सेना ने मोबाइल उपकरणों पर इस फीचर को फरवरी 2026 से ही बंद कर दिया था।
विचार
उच्च स्तरीय जांच की मांग
गोपनीयता विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एडवरटाइजिंग ID बंद करने से खतरा पूरी तरह टला नहीं है, क्योंकि नेटवर्क डाटा और ऐप्स के जरिए अभी भी लोकेशन का पता लगाया जा सकता है।
ऐसे में अमेरिकी सांसद कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
सीनेटर रॉन वेडेन और रिपब्लिकन प्रतिनिधि पैट हैरिगन ने पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मुख्यालय) से एक उच्च स्तरीय जांच की मांग की है कि क्या सैनिकों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम पर्याप्त हैं।
जानकारी
फोन सरेंडर करने का आदेश
अमेरिकी सेना एक और बड़े प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इसके तहत संवेदनशील सक्रिय सैन्य क्षेत्रों में तैनात कुछ सैनिकों को अपने स्मार्टफोन सरेंडर करने का आदेश दिया जा सकता है, ताकि ईरान या अन्य विरोधी देश अमेरिकी ठिकानों की पहचान न कर सकें।