शेख हसीना का पहला सार्वजनिक भाषण, बोलीं- मैं अपने लोगों के पास लौटूंगी
क्या है खबर?
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना करीब 2 साल बाद सार्वजनिक तौर पर नजर आई हैं। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम को उन्होंने ऑनलाइन संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वे पिछले 2 सालों से अपने प्रिय बांग्लादेश को रोते हुए देख रही हैं। उन्होंने कहा, "हमने इस बांग्लादेश की कभी कल्पना नहीं की थी। 30 लाख लोगों ने इसके लिए अपनी कुर्बानी नहीं दी थी।" बांग्लादेश छोड़ने के बाद यह पहली बार है, जब हसीना ने सार्वजनिक भाषण दिया है।
बयान
हसीना बोलीं- आंदोलन सोची-समझी साजिश था
हसीना ने कहा, "यह एक बहुत सोच-समझकर बनाई गई योजना थी, जिसका खुलासा खुद मुहम्मद यूनुस ने किया है। हमने बातचीत की कोशिश की, हाई कोर्ट के आरक्षण फैसले के खिलाफ अपील की और छात्र नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया। लेकिन छात्रों के आंदोलन को सरकार बदलने के एक-सूत्रीय आंदोलन में बदल दिया गया। जुलाई में छात्रों ने सार्वजनिक इमारतों को आग लगाना शुरू कर दिया और जेलों से अपराधियों को आजाद कर दिया।"
भाषण
हसीना ने कहा- मेरे खिलाफ 600 से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए गए
हसीना ने कहा, "450 से ज्यादा पुलिस स्टेशनों में आग लगा दी गई, सरकारी इमारतों पर हमले हुए और अधिकारियों की हत्या कर दी गई। 2 साल में 60,500 से ज्यादा अवामी लीग कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, 10,000 से ज्यादा गायब हो गए या मारे गए, 3,500 के खिलाफ FIR दर्ज की गई, 10 लाख से ज्यादा को अज्ञात मामलों में आरोपी बनाया गया। मेरे खिलाफ 600 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए।
रोक
बांग्लादेश ने की थी भाषण पर रोक लगाने की मांग
बांग्लादेश ने हसीना के भाषण पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि, भारत ने इससे इनकार कर दिया था।
भारत ने कहा था, "कार्यक्रम में सरकार की कोई भूमिका नहीं है। ये एक निजी कंपनी आयोजित कर रही है। सरकार वहां व्यक्त किए जाने वाले किसी भी विचार का समर्थन नहीं करती।"
बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने कहा था, "हम भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। हम नहीं चाहते कि रिश्ते खराब हों पड़े।"
वापसी
हसीना ने बांग्लादेश वापसी की कसम खाई
हसीना ने कहा कि अपने ऊपर चल रहे मुकदमों के बावजूद वह बांग्लादेश लौटेंगी।
उन्होंने कहा, "डर लोगों के प्रति मेरे फर्ज को तय नहीं कर सकता। मेरी वापसी सत्ता के लिए नहीं है, बल्कि "सुरक्षा, विकास, समृद्धि और शांति बहाल करने और बांग्लादेश को सही रास्ते पर वापस लाने के लिए है। असली ताकत लोगों के हाथ में होती है। मैं अपने लोगों के पास लौटूंगी। मुझे उन पर भरोसा है।"
निर्वासन
2 साल से भारत में हैं हसीना
अगस्त, 2024 में बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा शुरू हो गई थी। इसके बाद हसीना को ढाका छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। तब से हसीना भारत में ही हैं।
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी का आदेश देने के कारण बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने मानवता के विरुद्ध अपराधों को दोषी मानते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई है।
हसीना को 4 भ्रष्टाचार के मामलों में भी 26 साल की सजा सुनाई गई है।