नेपाल बाढ़ से पहले सैटेलाइट तस्वीरों में मिले थे खतरे के संकेत, वैज्ञानिकों का दावा
क्या है खबर?
नेपाल में बाढ़ के कारण अब तक 1,100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 4,000 से ज्यादा लोग अभी लापता हैं। ABC की रिपोर्ट के अनुसार, इस भयानक बाढ़ के आने से पहले सैटेलाइट तस्वीरों में ग्लेशियर को लेकर कुछ संकेत मिले थे। वैज्ञानिकों ने कहा कि इन संकेतों से खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता था। समय रहते इन पर ध्यान दिया जाता, तो नुकसान कम किया जा सकता था।
दरार
ग्लेशियर में दिखे बदलाव और दरार
वैज्ञानिकों के मुताबिक, नेपाल में बाढ़ से कुछ दिन पहले की सैटेलाइट तस्वीरों में ग्लेशियर के अंदर पानी तेजी से बढ़ता दिखाई दिया था।
इसे ग्लेशियर में हलचल और आसपास की चट्टानों के अस्थिर होने का संकेत माना गया। बाढ़ से दो दिन पहले पिघला हुआ पानी साफ तौर पर भूरा दिखा था। वैज्ञानिकों ने चट्टान की ढलान में एक बढ़ती हुई दरार भी देखी थी।
इन बदलावों ने खतरे की आशंका बढ़ा दी थी।
बाढ़
पहाड़ का हिस्सा ढहने से आई बाढ़
26 अगस्त को 7,234 मीटर ऊंचे लांगटांग लिरुंग पहाड़ के उत्तरी हिस्से का बड़ा भाग ढह गया था।
इसके साथ ग्लेशियर का एक हिस्सा भी नीचे घाटी में गिरा। चट्टान और बर्फ के इस एवलांच से भारी मलबा नीचे की ओर बहा और बाढ़ में बदल गया। इसका असर नेपाल और तिब्बत सीमा के आसपास के इलाकों पर पड़ा।
इस आपदा ने भोटे कोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी तंत्र को भी बुरी तरह प्रभावित किया।
अन्य
समय रहते चेतावनी से बच सकती थीं जानें
वैज्ञानिकों का कहना है कि संकेत हमेशा आपदा आने की पक्की जानकारी नहीं देते, लेकिन इनसे चेतावनी व्यवस्था बेहतर बनाई जा सकती है।
समय पर जानकारी मिलने पर नीचे लोगों को चेताया और कमजोर इलाकों को खाली कराया जा सकता था। HiRISK के अनुसार, 10 मिनट या उससे ज्यादा का चेतावनी समय भी कई जानें बचाने में मदद कर सकता था।
वैज्ञानिक जैकब स्टेनर ने AI आधारित सैटेलाइट निगरानी को खतरे की पहचान में उपयोगी बताया है।