सऊदी अरब ने ईरान के इस्लामिक मुद्दे पर घेरा, पूछा- इस्लामिक दुनिया में उनका क्या योगदान?
क्या है खबर?
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बीच ईरान अपने उन पड़ोसी इस्लामिक देशों को निशाना बना रहा है, जो अमेरिका के सहयोगी हैं। ईरान के इस कदम की सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने कड़ी आलोचना की है। उन्होंने रियाद में एक का्र्यक्रम में कहा कि मुझे यह समझ नहीं आता कि ईरान इस्लामिक देशों पर हमला करते हुए भी इस्लामिक मुद्दों की रक्षा करने का दावा कैसे कर सकते हैं।
दावा
ईरान का इस्लामिक दुनिया में क्या योगदान- प्रिंस फैसल
प्रिंस फैसल ने कहा, "वे सिर्फ़ एक देश पर हमला नहीं कर रहे हैं। सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, क़तर, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, लेबनान, जॉर्डन, इराक़, तुर्की, ये सभी इस्लामिक देश हैं, और इन सभी को निशाना बनाया गया है। इस युद्ध से पहले भी, इस्लामिक दुनिया में ईरान का क्या योगदान था? उन्होंने यमन में हूथी मिलिशिया का समर्थन किया। उन्होंने इराक में मिलिशिया का समर्थन किया और अब वे इराक़ी क्षेत्र पर हमला कर रहे हैं।"
हमला
इस्लामिक मुद्दों पर समर्थन का दावा कैसे
उन्होंने आगे कहा, "ईरान ने हिज़्बुल्लाह के जरिए लेबनान में दखल दिया। उन्होंने राजनीतिक फैसले लेने की प्रक्रिया हाईजैक किया, बल्कि सऊदी समेत पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैलाया। इसका उदाहरण सीरिया में ईरान और हिज़्बुल्लाह की भूमिका है। जब ऐसे काम हो रहे हों, तो मुस्लिम दुनिया के लिए उनका तथाकथित समर्थन कहां है? वे इस्लामिक मुद्दों के समर्थन का दावा कैसे कर सकते हैं, जबकि वे ऐसी सरकारों का साथ देते हैं जो अपने लोगों पर ज़ुल्म करती हैं।"
नारे
असलियत छिपाने के लिए इस्लामिक मुद्दे का इस्तेमाल
प्रिंस ने कहा कि ईरान लेबनान में राजनीतिक हस्तियों की हत्या करती हैं, और ऐसी मिलिशिया को ताक़त देती हैं जो इराक के विकास में रुकावट है। उन्होंने कहा, "मुझे इस्लामिक मुद्दों के लिए कोई असली समर्थन नजर नहीं आता। ये ऐसे नारे हैं जिनका इस्तेमाल अपनी असलियत छिपाने के लिए करते हैं। इन हथियारों का इस्तेमाल ईरान अपने हितों को साधने के लिए करता है न कि उन सिद्धांतों की रक्षा के लिए, जिनका वे दावा करते हैं।"
मुद्दा
हत्या से पहले अली लारीजानी ने इस्लामिक देशों को दिया था संदेश
इजरायली हमले में अपनी हत्या से एक दिन पहले ईरानी सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारीजानी ने एक्स पर विश्वभर के मुसलमानों और इस्लामी देशों की सरकारों को संबोधित करते हुए संदेश लिखा था। उन्होंने लिखा कि ईरान एक "विश्वासघाती अमेरिकी-ज़ायोनी आक्रमण" का शिकार हुआ है। उन्होंने दावा किया कि इन हमलों में अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई सैन्य अधिकारी-नागरिक मारे गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मौजूदा संघर्ष में मुस्लिम देशों ने तेहरान को मजबूत समर्थन क्यों नहीं दिया?