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RSS ने मोहन भागवत की ब्रिटेन यात्रा की आलोचना पर दी प्रतिक्रिया, जानिए क्या कहा
RSS ने मोहन भागवत की ब्रिटेन यात्रा की आलोचना पर प्रतिक्रिया दी है

RSS ने मोहन भागवत की ब्रिटेन यात्रा की आलोचना पर दी प्रतिक्रिया, जानिए क्या कहा

Sep 05, 2026
03:36 pm

क्या है खबर?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के यूनाइटेड किंगडम (UK) दौरे को लेकर लंदन में राजनीतिक और सामाजिक घमासान शुरू हो गया है। इस विरोध प्रदर्शन और आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए RSS ने साफ किया है कि संगठन हर किसी के साथ बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है। RSS के मीडिया प्रमुख सुनील आंबेकर ने लंदन में कहा कि वे किसी भी तरह की बहस और विचारों के स्वस्थ आदान-प्रदान की उम्मीद करते हैं।

मांग

लंदन के मेयर सादिक खान से की गई बहिष्कार की मांग

भागवत के लंदन आगमन के बाद वहां के 20 नागरिक समाज समूहों ने एकजुट होकर इसका कड़ा विरोध किया है।

इन 20 संगठनों ने लंदन के मेयर सादिक खान को एक आधिकारिक पत्र लिखकर मांग की है कि 'ग्रेटर लंदन अथॉरिटी' को RSS के सभी कार्यक्रमों का पूरी तरह से बहिष्कार करना चाहिए।

पत्र में नागरिक समूहों ने RSS को एक सत्तावादी और सैन्यवादी संगठन बताते हुए आरोप लगाया कि यह यूरोपीय फासीवाद से प्रेरित है।

जानकारी

न्यूयॉर्क के मेयर का दिया हवाला

संगठनों ने मेयर सादिक से अपील की है कि वे न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की तरह ही भागवत के इस दौरे की सार्वजनिक रूप से निंदा करें। मेट्रोपॉलिटन पुलिस से स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की भी जानकारी मांगी है।

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दौरा

संघ के 'शताब्दी वर्ष' आउटरीच कार्यक्रम का हिस्सा है यह दौरा

भागवत का यह दौरा संघ के वैश्विक संपर्क अभियान का बड़ा हिस्सा है।

यह विदेशी दौरा RSS के शताब्दी वर्ष आउटरीच टूर का हिस्सा है, जिसके तहत वे 3 देशों की यात्रा कर रहे हैं।

भागवत 2 सितंबर से 7 सितंबर तक ब्रिटेन के दौरे पर रहेंगे, जहां वे लंदन में एक बड़े जनसमूह को संबोधित करने वाले हैं।

इससे पहले अमेरिका और कनाडा के दौरों के दौरान भी उन्हें इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ा था।

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बयान

मैडिसन स्क्वायर गार्डन में क्या बोले थे भागवत?

अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित प्रसिद्ध मैडिसन स्क्वायर गार्डन में RSS के 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें 5,000 से अधिक लोग शामिल हुए थे।

वहां भागवत ने कहा था कि विविधता और एकता भारत के DNA का हिस्सा हैं। भागवत ने स्पष्ट किया था कि 'धर्म' केवल पूजा-पद्धति या कोई एक मजहब या धर्म नहीं है, बल्कि यह इन सबसे परे जीवन को थामने और आगे बढ़ाने वाला एक व्यापक सिद्धांत है।

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