PoK में तनाव बढ़ा, प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार को दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
क्या है खबर?
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में तनाव एक बार फिर बढ़ रहा है। जम्मू कश्मीर संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (JAAC) ने पाकिस्तान सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम जारी करते हुए चेतावनी दी है कि अगर उनकी 38 सूत्रीय मांगें नहीं मानी गईं, तो विरोध प्रदर्शन का 'बड़ा और आखिरी' चरण शुरू किया जाएगा। वहीं, JAC और PoK सरकार के बीच बातचीत भी बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई है।
अल्टीमेटम
मुरादाबाद तक विशाल मार्च निकालेगा JAAC
JAAC ने इस्लामाबाद को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो 9 जुलाई को 'बड़ा और आखिरी' प्रदर्शन किया जाएगा। समूह ने PoK और विदेशों में रहने वाले लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने और ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन, UN और मीडिया से जमीनी हालात पर नजर रखने की अपील की है। JAAC ने मुजफ्फरबाद तक एक विशाल विरोध मार्च की घोषणा की है।
सीटें
क्या है प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग?
प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी मांग पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को खत्म करने की है। JAAC का तर्क है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद को PoK की राजनीति पर प्रभाव बनाए रखने का मौका मिलता है। शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटें पाकिस्तान में लगभग 43 लाख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि बाकी 33 सीटें PoK के लगभग 33 लाख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
अन्य मांगें
क्या है JAAC की अन्य मांगें?
शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीट का मुद्दा केवल तात्कालिक है। इसके अलावा JAAC ने 38 सूत्रीय मांगों का प्रस्ताव सौंपा है। इनमें जलविद्युत परियोजनाओं पर पूरी तरह से पुनर्विचार करने, बढ़ती मुद्रास्फीति से निपटने के लिए आटे जैसी जरूरी वस्तुओं पर सब्सिडी देने और बिजली की दरों को कम करने की मांग की गई है। JAAC ने तर्क दिया कि PoK के लोगों को यहीं पैदा हुई बिजली के लिए ज्यादा भुगतान करना होता है।
वैश्विक
कई देशों में प्रदर्शन, मानवाधिकार समूहों ने उठाई आवाज
एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे मानवाधिकार समूहों ने JAAC पर पाकिस्तान के प्रतिबंध और असहमति को हिंसक तरीके से दबाने की आलोचना की है। लंदन, ऑकलैंड और ब्रैडफोर्ड में हुए विरोध-प्रदर्शनों ने PoK में पाकिस्तान के मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ आवाज को और बुलंद कर दिया है। वहीं, ब्रिटिश सांसद इमरान हुसैन ने पाकिस्तान से लॉकडाउन हटाने, संचार व्यवस्था बहाल करने और लोगों के अधिकारों का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण बातचीत का आग्रह किया है।
बयान
नेता बोले- पीछे नहीं हटेंगे
अवामी एक्शन कमेटी के वरिष्ठ नेता उमर नजीर कश्मीरी ने कहा कि बढ़ते दबाव के बावजूद आंदोलन पीछे नहीं हटेगा। न्यूज18 ने बैठक में मौजूद लोगों के हवाले से बताया कि उन्होंने कहा, "हम डटे रहेंगे और जरूरत पड़ने पर अपनी जान भी कुर्बान कर देंगे।" एक अन्य बयान में कहा गया है कि इतिहास ही अंततः मौजूदा गतिरोध के लिए जिम्मेदार लोगों का फैसला करेगा और आने वाली पीढ़ियां तय करेंगी कि उत्पीड़क कौन था और पीड़ित कौन था।
भारत
नेताओं ने भारत से मदद की गुहार लगाई
JAAC के नेता सरदार अमन खान ने भारत के साथ करीबी रिश्ते बनाने की मांग की है। उन्होंने भारत से मानवीय सहायता भेजने और नियंत्रण रेखा (LoC) पर सीमा खोलने की अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो आम लोगों के पास भारत जाने का विकल्प होना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें भारत की मदद चाहिए। राशन की कमी है और हमें आपकी मदद की जरूरत है।"