पैराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना ने इस्तीफा दिया, बैंक के डूबने से खड़ा हुआ राजनीतिक संकट
क्या है खबर?
दक्षिण अमेरिकी देश पैराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना ने इस्तीफा दे दिया है। पेना ने यह ऐलान उनसे जुड़े एक बैंक के डूबने से पैदा हुए राजनीतिक संकट के बाद किया है। संकट के केंद्र में यूनो बैंक है, जो पेना के राज में कुछ ही सालों में एक अनजान डिजिटल बैंक से देश के सबसे बड़े डिजिटल लेंडर्स में से एक बन गया। बैंक दावा करता है कि पैराग्वे की लगभग 60 प्रतिशत एडल्ट आबादी उसके ग्राहक हैं।
इस्तीफा
पेना ने क्या कहा?
पेना ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो मैसेज में कहा, "अगर मैं किसी भी पॉइंट पर फेल हुआ हूं तो मैं लोगों से माफी मांगना चाहता हूं। आपने मुझ पर जो भरोसा दिखाया है, उसे धोखा देने का मेरा कोई इरादा नहीं था।"
पेना ने अपनी ही कंजर्वेटिव कोलोराडो पार्टी में समर्थन खोने के बाद, सांसदों के महाभियोग की कार्रवाई शुरू करने से कुछ घंटे पहले ही पद छोड़ दिया।
पेना महाभियोग की कार्रवाई के लिए सीनेट में पेश होंगे।
कार्रवाई
क्या है यूनो बैंक?
यूनो एक खास फिनटेक से बढ़कर एक मिड-साइज बैंक बन गया था, जो 60 लाख लोगों के देश में लगभग 30 लाख ग्राहकों को सेवा देता था।
इसने लगभग 85 करोड़ डॉलर (करीब 8,035 करोड़ रुपये) के पब्लिक फंड को भी मैनेज किया, जिसमें सरकारी संस्थानों और पेंशन से जुड़ा पैसा भी शामिल था।
इसके बंद होने से अकाउंट एक्सेस नहीं हो रहा, जिससे राजनीतिक दबाव बढ़ा। पैराग्वे के लोग बचत-भुगतान और फायदों के लिए इसी बैंक पर निर्भर थे।
जानकारी
सेंट्रल बैंक ने कसा शिकंजा
यह उथल-पुथल तब शुरू हुई जब पैराग्वे के सेंट्रल बैंक ने यूनो में दखल दिया और कहा कि तेज़ी से बढ़ते डिजिटल बैंक ने न्यूनतम सॉल्वेंसी जरूरतों को तोड़ा है। इसके बाद यूनो के 8 अधिकारियों के लिए अरेस्ट वारंट जारी किया गया।