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म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में पाकिस्तानी सेना प्रमुख को प्रवेश द्वार पर रोका, मांगा गया पहचान पत्र
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर को प्रवेश द्वार पर रोका गया

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में पाकिस्तानी सेना प्रमुख को प्रवेश द्वार पर रोका, मांगा गया पहचान पत्र

Feb 15, 2026
12:37 pm

क्या है खबर?

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को उस वक्त असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब उन्हें प्रवेश द्वारा पर सुरक्षाकर्मियों ने रोक लिया। बताया जा रहा है कि उन्हें बाकी आम प्रतिभागियों की तरह ही पहचान पत्र दिखाने को कहा गया। प्रवेश पत्र दिखाने के बाद ही उन्हें सम्मेलन में प्रवेश दिया गया। इस घटना को लेकर विदेशों में पाकिस्तान की स्थिति पर चर्चा शुरू हो गई है।

घटना

कैसे घटित हुआ पूरा घटनाक्रम?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और दावों के मुताबिक, कॉन्फ्रेंस स्थल पर तैनात एक महिला सुरक्षाकर्मी ने मुनीर को रोकते हुए कहा, "रुकिए, आपका आईडी कहां है? कृपया अपना कार्ड दिखाइए।" सूत्रों का कहना है कि सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ किसी विशेष मेहमान की तरह नहीं, बल्कि एक सामान्य प्रतिनिधि की तरह व्यवहार किया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई लोग इसे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि से जोड़कर देख रहे हैं।

ट्विटर पोस्ट

यहां देखें वीडियो

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हमला

आलोचकों ने बोला तीखा हमला

आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान के भीतर बेहद ताकतवर माने जाने वाले सैन्य प्रमुख मुनीर को वैश्विक मंच पर वैसी पहचान नहीं मिल पाई, जैसी उनके समर्थक दावा करते हैं। पूर्व पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी आदिल राजा ने भी इस मामले पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उन्हें बहुत कम लोग पहचानते हैं और यही वजह है कि उन्हें प्रवेश द्वार पर रोककर औपचारिक जांच की गई। उनके इस बयान ने बहस को और बढ़ा दिया।

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कारण

मुनीर से क्यों मांगा गया पहचान पत्र?

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि म्यूनिख जैसे उच्चस्तरीय सम्मेलन में सुरक्षा बेहद सख्त रहती है। वहां सभी प्रतिभागियों, चाहे वे किसी भी देश के बड़े अधिकारी क्यों न हों उन्हें निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पहचान पत्र की जांच सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया भी माना जा सकता है। हालांकि, यह घटना पाकिस्तान में चर्चा का विषय बन गई है। कुछ लोग इसे प्रोटाकॉल का उल्लंघन बता रहे हैं, तो कुछ इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समान नियम कह रहे हैं।

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