मक्का समझौते पर आलोचनाओं के बाद घिरा पाकिस्तान, शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस से की बात
क्या है खबर?
सऊदी अरब पर हमलों के बाद हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान पीछे हट गया था। इसके बाद मक्का समझौते को लेकर पाकिस्तान की खूब आलोचना हो रही थी। अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात की और सऊदी अरब के नागरिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे पर हुए हूती हमलों की कड़ी निंदा की।
बयान
शरीफ ने कहा- सऊदी नेतृत्व और जनता के साथ एकजुटता व्यक्त की
शरीफ ने कहा, "मैंने सऊदी अरब में नागरिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए गए हूती हमलों की पाकिस्तान की ओर से कड़ी निंदा दोहराई और सऊदी नेतृत्व और हमारे सऊदी भाइयों-बहनों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की।"
उन्होंने कहा कि इन हमलों से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को खतरा है और वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
उन्होंने मोहम्मद बिन सलमान 'बुद्धिमान और दूरदर्शी नेतृत्व' की भी तारीफ की।
चर्चा
दोनों नेताओं में और क्या हुई चर्चा?
शरीफ के कार्यालय के अनुसार, मोहम्मद बिन सलमान ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की दिशा में सऊदी अरब और उसके प्रयासों के लिए पाकिस्तान के दृढ़ समर्थन की सराहना की।
दोनों नेताओं ने घनिष्ठ संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई और जल्द ही मुलाकात की उम्मीद जताई।
शरीफ ने कहा कि उन्होंने मोहम्मद बिन सलमान से बात की और सऊदी अरब के लिए पाकिस्तान के समर्थन की पुष्टि भी की।
मक्का समझौता
क्यों हो रही है मक्का समझौते की चर्चा?
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच 7 अगस्त को मक्का संयुक्त रक्षा समझौता हुआ था। इसके तहत, तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला सभी देशों पर हमला माना जाएगा।
हाल ही में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर कई हमले किए हैं। इसके बाद उम्मीद थी कि पाकिस्तान इस समझौते की प्रतिबद्धता को निभाते हुए हूतियों के खिलाफ सऊदी का साथ देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
पाकिस्तान
सऊदी का साथ न देने पर पाकिस्तान ने क्या दलील दी?
पिछले हफ्ते पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था, "अगर बिना उकसावे के हमला होता है, या यमन में जो कुछ भी हो रहा है उसका असर सऊदी अरब पर पड़ता है, तो मक्का समझौता निश्चित रूप से लागू हो जाएगा।"
हालांकि, अगले ही दिन पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि समझौते के तहत किसी भी सैन्य कार्रवाई पर चर्चा नहीं हो रही है और इस्लामाबाद की गठबंधन का विस्तार करने की तत्काल कोई योजना नहीं है।