नेपाली प्रधानमंत्री ने बाढ़ के दौरान समय पर सहायता के लिए भारत-चीन की मदद को सराहा
क्या है खबर?
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र (बालेन) शाह ने एक हफ्ते पहले आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान समय पर सहायता प्रदान करने के लिए भारत और चीन को धन्यवाद दिया है। नेपाल की संसद (प्रतिनिधि सभा) में बोलते हुए शाह ने कहा कि इतनी बड़ी आपदा की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय सहायता को अस्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि नेपाल ने निजी क्षेत्र से समय पर सहायता प्राप्त करने के लिए अन्य देशों के साथ समन्वय किया था।
बयान
क्या बोले बालेन?
बालेन ने संसद में कहा, "हमारे मित्र देशों, चीन और भारत ने तकनीशियन भेजे थे। पहले दिन से ही उन्होंने हवाई सर्वेक्षण सहित क्षेत्र में हुए नुकसान का आकलन करने और यह निर्धारित करने के लिए सर्वेक्षण किया कि क्या उस स्थान तक पहुंचना संभव है।"
उन्होंने आगे बताया कि भारतीय तकनीशियन यथाशीघ्र दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचने में सक्षम रहे, जो कि एक असाधारण स्थिति थी, घटनास्थल पर कीचड़ और गाद की वजह से राहत और बचाव कार्य मुश्किल था।
बयान
भारत की टीम नेपाल और चीन के साथ काम कर रही है
अपने लिखित भाषण से इतर बालेन ने कहा कि घटनास्थल पर कीचड़ और गाद इतनी अधिक थी कि न केवल उत्खनन यंत्रों, बल्कि सेना और सशस्त्र पुलिस बल के कर्मियों के लिए भी खड़े होने की जगह नहीं थी, लेकिन भारतीय तकनीशियन दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचने में सफल रहे।
बता दें कि भारत सरकार बाढ़ से प्रभावित लोगों के शीघ्र बचाव और राहत कार्यों के लिए नेपाल और चीन के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही है।
आपदा
बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1,227 हुई
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 1,127 हो गई। अब तक 11,000 से अधिक लोगों को बचाया गया है, जबकि 4,858 लोग लापता हैं।
शाह ने पिछले सप्ताह भोटेकोशी नदी के माध्यम से रसुवा में आई बाढ़ का कारण जलवायु परिवर्तन बताया था। बुधवार को संसद में भी उन्होंने यही बात दोहराई।
उन्होंने कहा कि नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सूचित किया है कि बाढ़ का कारण जलवायु परिवर्तन था।