नेपाल में Gen-Z आंदोलन के 6 महीने बाद संसदीय चुनाव, मतदान शुरू
क्या है खबर?
नेपाल में Gen-Z आंदोलन के 6 महीने बाद राष्ट्रीय संसद के लिए मतदान शुरू हो गया है। गुरुवार को 1.89 करोड़ मतदाता 275 सीटों के लिए मतदान करेंगे। नेपाली की 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा के लिए मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ है और शाम 5 बजे तक चलेगा। नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने नागरिकों से बड़ी संख्या में मतदान में भाग लेने और शांति-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहाकि "शांति ही नेपाल की पहचान है।"
चुनाव
कौन हैं मुख्य दावेदार?
नेपाल के चुनाव में प्रत्यक्ष 3,406 उम्मीदवार और आनुपातिक प्रतिनिधित्व चुनाव में 3,135 उम्मीदवार हैं। प्रत्यक्ष उम्मीदवारों में 3,017 पुरुष और 388 महिलाएं हैं। चुनाव में लगभग 65 राजनीतिक दल चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें शीर्ष पद के लिए 3 मुख्य दावेदार हैं। इसमें रैपर से राजनेता बने और काठमांडू के मेयर बलेंद्र शाह (बालेन) प्रबल दावेदार हैं। नेपाली कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे गगन थापा, पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली और पुष्प कमल दहल भी मैदान में हैं।
चुनाव
नेपाल में चुनाव कैसे होता है?
नेपाली संसद (प्रतिनिधि सभा) की 275 सीटों में 165 सदस्य प्रत्यक्ष मतदान से, जबकि 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का उपयोग करके आवंटित की जाती हैं। चुनाव अधिकारी मतपेटियों को एकत्र कर 24 घंटे के भीतर प्रत्यक्ष मतदान के परिणाम घोषित करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, आनुपातिक परिणामों में 1-2 दिन लगेंगे। पिछले साल हुए Gen-Z विरोध प्रदर्शनों के बाद मतदाता सूची में करीब 10 लाख नए मतदाता जोड़े गए हैं।
सुरक्षा
कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान, तीन दिन का अवकाश घोषित
चुनाव के लिए लगभग 3,30,000 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जिनमें नेपाली सेना के 80,000 अधिकारी शामिल हैं। यहां हवाई गश्त, मतदान केंद्रों की सुरक्षा और मतपेटियों के सुरक्षित परिवहन सहित 3 चरणों वाली सुरक्षा योजना लागू है। नेपाल में चुनाव के दौरान 4-6 मार्च तक 3 दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित है और भारत-नेपाल सीमा 2 मार्च की मध्यरात्रि से 5 मार्च की मध्यरात्रि तक बंद है। मतदान से 7 दिन पहले और मतगणना तक पूरे देश में शराबबंदी है।
आंदोलन
क्या है Gen-Z आंदोलन?
नेपाल में केपी ओली की सरकार ने 4 सितंबर, 2025 को देश में फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, वाट्सऐप जैसे 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसके बाद युवाओं का विरोध शुरू हुआ। बाद में विरोध भ्रष्टाचार, वंशवाद, बेरोजगारी और जैसे गहरे मुद्दों पर केंद्रित हो गए और 8-13 सितंबर तक चले युवाओं के आंदोलन में 77 मौत हुई और राष्ट्रपति भवन समेत कई जगह आग लगाई गई। बाद में पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशील कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया।