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नवी पिल्लै ने नोबेल शांति पुरस्कार जीतने के बाद ट्रंप पर कसा तंज, जानिए क्या कहा
दक्षिण अफ्रीका की नवी पिल्लै ने नोबेल शांति पुरस्कार जीतने के बाद ट्रंप पर कसा तंज

नवी पिल्लै ने नोबेल शांति पुरस्कार जीतने के बाद ट्रंप पर कसा तंज, जानिए क्या कहा

Oct 09, 2026
06:52 pm

क्या है खबर?

वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा हो चुकी है। इस बार यह प्रतिष्ठित वैश्विक सम्मान अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली दक्षिण अफ्रीका की भारतीय-तमिल न्यायविद नवनीतम 'नवी' पिल्लै को दिया गया है। इस बड़ी उपलब्धि के बाद 85 वर्षीय पिल्लै ने अपने सहयोगियों की तालियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर एक बेहद मजेदार और तीखा तंज कसा है। उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

तंज

पिल्लै ने कैसे कसा तंज?

जर्मनी के नूर्नबर्ग में एक कानूनी सम्मेलन में भाग लेने के दौरान जैसे ही पिल्लै को नोबेल पुरस्कार जीतने की खबर मिली, वहां मौजूद लोगों ने तालियों से उनका स्वागत किया।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के महासचिव द्वारा एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में पिल्लै ने कहा, "अगर आप थोड़ी और ताली बजाएंगे तो हो सकता है मैं यह पुरस्कार ट्रंप के साथ साझा करूं।"

वीडियो में पिल्लै को नूर्नबर्ग में तालियां बजाते हुए दिखाया गया है।

मजाक

पिल्लै ने शुरुआती सूचना को समझा था मजाक

पिल्लै ने शुरुआती सूचना को मजाक समझने पर कहा, "जब क्रिस्टोफ ने मुझे डेस्क से बुलाकर बताया कि मैंने नोबेल शांति पुरस्कार जीता है, तो मुझे लगा कि यह निश्चित रूप से कोई मज़ाक है। आपके द्वारा दी जा रही ये तालियां मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं, लेकिन एक वकील और जज होने के नाते मैं अभी भी इस खबर को पूरी तरह सत्यापित करना चाहती हूं। मैं अभी भी इस आश्चर्य से उबर नहीं पा रही हूं।"

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सवाल

पिल्लै ने क्यों लिया ट्रंप का नाम?

पिल्लै का यह मजाक असल में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की उस गहरी इच्छा पर एक कटाक्ष था, जिसके तहत ट्रंप कई बार खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का सबसे बड़ा हकदार बता चुके हैं।

ट्रंप का दावा है कि उन्होंने दुनिया के 8 बड़े युद्धों को रुकवाने और शांति स्थापित करने में भूमिका निभाई है, इसलिए उनसे ज्यादा कोई भी इस पुरस्कार के योग्य नहीं है।

ऐसे में पिल्लै का यह बयान ट्रंप पर बड़ा तंज माना जा रहा है।

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परिचय

कौन हैं पिल्लै?

पिल्लै दक्षिण अफ्रीका की न्यायविद हैं, जिन्होंने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के तौर पर काम किया है।

उनका जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था, जहां उन्होंने नटाल विश्वविद्यालय से पढ़ाई की।

उन्होंने वकील के तौर पर अपना करियर शुरू किया और रंगभेद के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी।

वे हार्वर्ड विश्वविद्यालय में भी पढ़ाई कर चुकी हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में कई अहम पदों पर काम किया है।

जानकारी

गाजा रिपोर्ट पिल्लै की रही है अहम भूमिका

पिल्लै ने हाल ही में गाजा में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों पर संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र जांच समिति का नेतृत्व भी किया था, जिसे उन्होंने अपने करियर का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है।

नाता

पिल्लै का भारत से क्या है नाता?

पिल्लै भारतवंशी हैं। उनका परिवार भारत के तमिलनाडु से है। उनके दादा-दादी 1890 के दशक में भारत से अनुबंध पर काम करने वाले मजदूरों के तौर पर दक्षिण अफ्रीकी चीनी बागानों में काम करने गए थे।

इसके बाद वे वहीं बस गए। उनके माता-पिता की शादी कम उम्र में ही हो गई थी और उनके 8 बच्चे थे, जिनमें पिल्लै 5वीं संतान थीं। उनके पिता बस ड्राइवर थे।

पिल्लै दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट की पहली गैर-श्वेत महिला जज हैं।

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