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इटली के स्कूलों में बुर्का-नकाब प्रतिबंध और विदेशी छात्रों की संख्या क्यों घटाना चाहती हैं मेलोनी?
इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करना चाहती हैं

इटली के स्कूलों में बुर्का-नकाब प्रतिबंध और विदेशी छात्रों की संख्या क्यों घटाना चाहती हैं मेलोनी?

लेखन गजेंद्र
Sep 21, 2026
02:47 pm

क्या है खबर?

इटली की दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने एक विधायी पैकेज का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत स्कूलों में बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसके साथ ही व्यक्तिगत कक्षाओं में विदेशी छात्रों की संख्या को सीमित करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। मेलोनी ने यह घोषणा रविवार को अपनी राष्ट्रवादी रूढ़िवादी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा विंग की एक सभा में की और रूपरेखा प्रस्तुत की। मेलोनी ये कदम क्यों उठाने जा रही हैं? आइए, जानते हैं।

प्रस्ताव

क्या है मेलोनी की प्रस्तावित योजना?

विधेयक विद्यालयों के अंदर बुर्का-नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाता है। हालांकि, यह हिजाब पर प्रतिबंध नहीं लगाता, जिसमें चेहरा खुला रहता है।

विधेयक प्रति कक्षा में अनुमत विदेशी छात्रों की अधिकतम संख्या पर कानूनी सीमा निर्धारित करता है।

कानून के तहत उन विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए इतालवी भाषा अनिवार्य होगी, जिन्हें स्कूल प्रणाली में एकीकृत होने में समस्या है।

प्रस्ताव तब कानून बनेगा, जब मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद 60 दिनों में संसद से पास हो जाए।

बयान

बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध क्यों चाहती हैं मेलोनी?

रोम में आयोजित जियोवेंटू नाज़ियोनेल राष्ट्रीय उत्सव में मेलोनी ने कहा कि इटली की सड़कों या स्कूलों में जेंडर इक्वालिटी (स्त्री-पुरुष समानता) पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि युवा महिलाओं को अपना चेहरा ढकने के लिए मजबूर करने को सही ठहराने के लिए दबाव नहीं दिया जाना चाहिए।

मेलोनी का तर्क है कि वो बुर्का-नकाब प्रतिबंधित कर स्त्री-पुरुष समानता को बढ़ावा देना चाहती हैं। हालांकि, इसे प्रतिबंधित करने की मांग देश में काफी उठ रही थी।

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मुद्दा

स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने के पीछे क्या है मेलोनी का तर्क?

मेलोनी की कहना है कि वह हर क्लास में विदेशी छात्रों की संख्या को भी सीमित करेंगी और जिन विदेशी छात्रों को घुलने-मिलने में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं, उनके माता-पिता को इतालवी भाषा सीखनी होगी।

मेलोनी का तर्क है कि अगर किसी कक्षा में इतालवी भाषा न समझने वाले विदेशी मूल के बच्चों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाती है, तो उनके लिए स्कूल में तेजी से घुलना-मिलना और भाषा सीखना मुश्किल हो सकता है।

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प्रतिबंध

क्या यूरोप में इटली में पहला देश जो लगा रहा प्रतिबंध?

यूरोप में इटली से पहले कई ऐसे देश हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर और निकाय स्तर पर बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाया है। हालांकि, हिजाब पर कई जगह प्रतिबंध नहीं है।

बुर्का शरीर को पूरा ढकता है और नकाब चेहरे में आंखों को छोड़कर बाकी हिस्सा ढकता है, उसे सुरक्षा, समानता और सामाजिक संपर्क बढ़ाने की दृष्टि से प्रतिबंधित किया गया है।

हालांकि, स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने के मामले में, इटली पहला यूरोपीय देश है।

मुद्दा

मेलोनी क्यों मुद्दे को दे रही हैं तूल?

इटली में अगले साल आम चुनाव हैं और वहां अप्रवासी-एकीकरण बड़ा मुद्दा है।

मेलोनी की पार्टी से भी अधिक दक्षिणपंथी रुख रखने वाली ताकतें इस मुद्दे पर दबाव बना रही हैं।

इटली में नेशनल फ्यूचर पार्टी ने जुलाई में स्कूलों में बुर्का के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी और वह मेलोनी की पार्टी से भी अधिक कठोर रुख रखती है।

कई यूरोपीय देश कॉलेजों में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करते हैं, लेकिन इटली इसे स्कूलों पर लागू करेगा।

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