ईरान ने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम छोड़ने से इनकार किया, कहा- अमेरिका की धमकी से डरेंगे नहीं
क्या है खबर?
ईरान ने अमेरिका की सैन्य धमकियों और नए प्रतिबंधों के बाद भी परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को छोड़ने से इनकार कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को तेहरान में एक सार्वजनिक मंच पर कहा कि तेहरान अपनी परमाणु नीति को बदलने के लिए किसी के दबाव में नहीं आएगा। उन्होंने इसको लेकर चल रही बातचीत में अमेरिका के इरादों को लेकर शंका जताई और कहा कि सैन्य तैनाती से वह डरते नहीं हैं।
इनकार
परमाणु संवर्धन गैर-समझौता योग्य मुद्दा- अराघची
अराघची ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया की मौजूदगी में कहा कि यूरेनियम संवर्धन अभी भी तेहरान के लिए एक गैर-समझौता योग्य मुद्दा है। उन्होंने कहा, "हम समृद्धि पर इतना जोर क्यों देते हैं और युद्ध थोपे जाने पर भी इसे छोड़ने से इनकार क्यों करते? क्योंकि किसी को भी हमारे व्यवहार को निर्देशित करने का अधिकार नहीं है।" उन्होंने अमेरिकी सैन्य तैनाती को अप्रभावी दबाव की रणनीति बताकर खारिज कर कहा, "इस क्षेत्र में उनकी सैन्य तैनाती से हमें डर नहीं लगता।"
विश्वास
अमेरिका पर भरोसे को लेकर संदेह
अराघची ने अमेरिका के भरोसे को लेकर भी शंका जताई और सवाल उठाया कि क्या अमेरिकी पक्ष वास्तव में कूटनीति के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि तेहरान किसी भी ऐसे समझौते पर सहमत नहीं होगा जो उसकी स्वतंत्रता या राष्ट्रीय गरिमा को कमजोर करे। उन्होंने परमाणु हथियार विकसित करने के आरोपों पर कहा, "वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम परमाणु बम की तलाश में नहीं हैं। हमारा परमाणु बम महाशक्तियों को 'ना' कहने की शक्ति है।"
दबाव
अमेरिका का दबाव जारी
ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में बातचीत होने के बाद भी क्षेत्र में अमेरिकी अधिकािरियों के दौरे से तनाव बना हुआ है। अमेरिकी मुख्य वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर ने विमानवाहक पोत का दौरा किया, जिससे वाशिंगटन की सैन्य उपस्थिति स्पष्ट हुई। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने इस ऑपरेशन की पुष्टि की, जबकि विटकॉफ ने कहा कि विमानवाहक पोत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की "शक्ति के माध्यम से शांति" की नीति का समर्थन कर रहा है।
चेतावनी
ईरान के राष्ट्रपति ने भी दी चेतावनी
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने ओमान में मध्यस्थता के बाद अगले सप्ताह परमाणु वार्ता के एक और दौर की वार्ता से पहले अमेरिका से देश का सम्मान करने का आह्वान किया है। उन्होंने रविवार को एक्स पर लिखा, 'परमाणु मुद्दे पर हमारा तर्क परमाणु अप्रसार संधि में निर्धारित अधिकारों पर आधारित है। ईरानी राष्ट्र ने हमेशा सम्मान का जवाब सम्मान से दिया है, लेकिन बल की भाषा को सहन नहीं कर सकता।'