ईरान के निशाने पर अब दुनिया का इंटरनेट? होर्मुज में समुद्र के नीचे तारों पर खतरा
क्या है खबर?
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु संवर्धन नष्ट करने को लेकर शुरू हुई लड़ाई तेल-गैस की आपूर्ति से होते हुए इंटरनेट तक पहुंचने जा रही है। ईरान की तसनीम न्यूज एजेंसी ने फारस की खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछे इंटरनेट केबलों और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर एक रिपोर्ट में बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने अप्रत्यक्ष चेतावनी जारी की है। वह क्षेत्र की डिजिटल रीढ़ को लक्ष्य बना सकता है, जिससे पूरी दुनिया में संकट पैदा होगा।
खतरा
ईरानी रिपोर्ट में क्या है?
बुधवार को प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ ऊर्जा चोकपॉइंट ही नहीं बल्कि खाड़ी देशों को इंटरनेट सेवा देने वाला प्रमुख समुद्री गलियारा भी है। इसमें तर्क दिया गया कि कई प्रमुख केबल प्रणालियां जलमार्ग या उसके पास से गुजरती हैं और फारस की खाड़ी का दक्षिणी भाग ईरान की तुलना में समुद्री इंटरनेट मार्गों पर ज्यादा निर्भर है। अगर इसे दुर्घटनावश या जानबूझकर नुकसान पहुंचा तो फारस की खाड़ी में गंभीर बिजली कटौती हो सकती है।
युद्ध
युद्ध का असर इंटरनेट की सेवा पर
रिपोर्ट में फारस की खाड़ी के दक्षिणी भाग में स्थित राज्यों, विशेष रूप से UAE और बहरीन में क्लाउड और डाटा-सेंटर बुनियादी ढांचे के संकेंद्रण पर ध्यान आकर्षित किया गया है। रिपोर्ट में प्रभावी रूप से उन संपत्तियों का एक नक्शा तैयार किया, जिनके व्यवधान से बड़े आर्थिक और संचार संबंधी परिणाम हो सकते हैं। संघर्ष का दबाव बंदरगाहों, जहाजरानी मार्गों और ऊर्जा सुविधाओं के साथ-साथ अब इंटरनेट तारों और क्षेत्रीय डाटा हब पर भी दिख सकता है।
गंभीर
कितनी गंभीर है यह चेतावनी?
ईरानी मीडिया की गंभीरता को ऐसे भी मापा जा सकता है कि यमन में ईरान समर्थित हाउथी विद्रोहियों ने अतीत में ऐसे बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकी दी थी। ईरान ने भी पिछले दिनों UAE और बहरीन में अमेजन वेब सर्विसेज की सुविधाओं को निशाना बनाया था। वर्ष 2024-2025 में, क्षेत्रीय तनाव के दौरान लाल सागर में बिछी कई समुद्री केबल क्षतिग्रस्त हुईं थी, जिसकी मरम्मत में काफी समय लगा था। इससे कई देशों में इंटरनेट प्रभावित था।
खतरा
कितना बड़ा है समुद्र के नीचे इंटरनेट जाल?
होर्मुज जलडमरूमध्य महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग के साथ ही डिजिटल केंद्र भी है। यहां पानी के नीचे फाइबर-ऑप्टिक केबलों का एक घना जाल है जो वैश्विक संचार की रीढ़ है। अगर ये केबल टूटे तो प्रभाव मध्य-पूर्व से कहीं अधिक दूर तक महसूस होगा। ये लाइनें क्षेत्रीय इंटरनेट ट्रैफिक का अनुमानित 17-30 प्रतिशत हिस्सा वहन करती हैं, जो एशिया, यूरोप और मध्य-पूर्व को जोड़ती हैं। ये तारें खाड़ी देशों में अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल की AI ढांचे को बिजली देती हैं।
गंभीरता
भारत पर कितना दिखेगा असर?
अगर समुद्र के नीचे बिछे तार को नुकसान पहुंचा तो भारत पर भी इसका असर दिख सकता है। दरअसल, समुद्री तार नेटवर्क ओमान, UAE और पाकिस्तान सहित कई देशों में स्थित लैंडिंग स्टेशनों से होकर गुजरता है और डाटा का सबसे बड़ा उपभोक्ता भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था इन कनेक्शनों पर अत्यधिक निर्भर है। अगर व्यवधान पैदा हुआ तो लाखों उपयोगकर्ताओं के लिए इंटरनेट की गति, क्लाउड सेवाओं, डिजिटल भुगतान प्रणालियों में रुकावट और IT-AI क्षेत्रों में आर्थिक दुष्परिणाम दिखेंगे।
संभावना
डाटा युद्ध होने की कितनी संभावना?
समुद्र के नीचे बिछे तारों की निगरानी और सुरक्षा कठिन है। छोटी सी गड़बड़ी भी वित्तीय प्रणाली को धीमा कर सकता है और संचार नेटवर्क बाधित होगा। केबल बिछाने के लिए जिम्मेदार फ्रांसीसी सरकारी कंपनी अल्काटेल सबमरीन नेटवर्क्स ने ग्राहकों को अप्रत्याशित घटना (फोर्स मेज्योर) की सूचना जारी कर खतरे की संभावना को और बढ़ा दिया है। हालांकि, ऐसे किसी खतरे की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस चेतावनी ने डाटा क्षेत्र में चिंता बढ़ाई है।