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प्रधानमंत्री मोदी के सामने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने दिया अजीबोगरीब बयान, जानिए क्या कहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया के दौरे पर हैं

प्रधानमंत्री मोदी के सामने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने दिया अजीबोगरीब बयान, जानिए क्या कहा

लेखन गजेंद्र
Jul 08, 2026
02:46 pm

क्या है खबर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया के दौरे पर हैं। मंगलवार को राजधानी जकार्ता में भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम में ऐसा वाकया घटा, जिसकी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है। दरअसल, कार्यक्रम में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने कहा कि अगर किसी नेता को पोडियम और माइक्रोफोन मिल जाए तो वह हटना नहीं चाहता है। इसके बाद उन्होंने मजाक में सफाई दी कि वह भारत की घरेलू राजनीति में दखल नहीं दे रहे।

बयान

क्या बोले राष्ट्रपति सुबियांतो?

जकार्ता में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति सुबियांतो ने कहा, "मैं अपना छोटा भाषण समाप्त करूंगा। किसी भी राजनीतिक नेता के साथ खतरा यह होता है कि अगर उन्हें पोडियम और माइक्रोफोन मिल जाए, तो वे उससे हटना नहीं चाहते। मैं भारत की घरेलू राजनीति में दखल नहीं दे रहा हूं, लेकिन मैं व्यक्तिगत रूप से नरेंद्र मोदी जी का प्रशंसक हूं।" अपने बयान पर राष्ट्रपति सुबियांतो मुस्कुरा पड़े और वहां मौजूद लोगों को भी हंसते देखा गया।

बयान

भारतीय लोकतांत्रिक परपंरा की तारीफ की

राष्ट्रपति सुबियांतो ने अपने भाषण में भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा की तारीफ की और कहा कि इससे इंडोनेशिया के लोग सीख सकते हैं। उन्होंने कहा, "हम भारत को देखते हैं, जो 140 करोड़ लोगों का देश है, जिसमें हमारे जैसे कई जातीय समूह और कई क्षेत्रीय भाषाएं हैं। लेकिन इतने वर्षों तक इतने राज्यों में और भारत संघ में शांतिपूर्ण ढंग से सरकारों का हस्तांतरण करवाना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।" उन्होंने भारत की असाधारण उपलब्धियों का अनुसरण करने की बात कही।

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ट्विटर पोस्ट

राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो का भाषण

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मायने

राष्ट्रपति के इस बयान के क्या मायने हैं?

इंडोनेशिया में सुबियांतो चुनाव से राष्ट्रपति बने हैं, लेकिन मानवाधिकार संगठन और अंतरराष्ट्रीय मीडिया चिंतित है कि उनकी सरकार सेना की भूमिका को नागरिक प्रशासन में बढ़ा रही है। पूर्व सैन्य जनरल और रक्षा मंत्री सुबियांतो ने 2025 में सैन्य कानून में ऐसा बदलाव किया, जिससे सक्रिय सैन्य अधिकारियों के लिए अधिक सरकारी नियुक्तियों का रास्ता खुला। ऐसे में चिंता है कि इंडोनेशिया दोषपूर्ण लोकतंत्र की तरफ बढ़ रहा है, जहां चुनाव स्वतंत्र होते हैं, लेकिन कई चुनौतियां होती हैं।

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