इंडोनेशिया में ज्वालामुखी विस्फोट के कारण हवाई अड्डे बंद; 2,000 उड़ानें रद्द, 2.70 लाख लोग फंसे
क्या है खबर?
इंडोनेशिया के प्रसिद्ध माउंट अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में कई विस्फोट होने के बाद हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ज्वालामुखी से निकली राख आसमान में 50,000 फीट की ऊंचाई तक फैल गई है। इसके बाद राजधानी जकार्ता के दोनों हवाई अड्डों समेत देश के 8 हवाई अड्डे 2 दिन से पूरी तरह बंद पड़े हैं। इस वजह से 2,000 से ज्यादा उड़ानों को रद्द करना पड़ा है और करीब 2.70 लाख लोग फंसे हुए हैं।
हवाई अड्डे
हवाई अड्डों पर परेशान हो रहे यात्री
जकार्ता के सोकार्नो-हट्टा और हलीम परदानकुसुमा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और 3 अन्य हवाई अड्डों को आज स्थानीय समयानुसार शाम 6 बजे तक बंद रखा गया है। बाली के मुख्य हवाई अड्डे को भी बंद रखा गया है।
इस दौरान सभी हवाई अड्डों पर यात्रियों की लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इंडोनेशिया के परिवहन मंत्री डुडी पुरवागांधी ने कहा, "मौसम में लगातार बदलाव के कारण हम यह निश्चित नहीं कर सकते कि यह कब खत्म होगा।"
विस्फोट
ज्वालामुखी में 3 धमाके हुए
अनाक क्राकाटाऊ ज्वालामुखी जकार्ता से करीब 150 किलोमीटर दूर जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच है।
इंडोनेशिया की भूवैज्ञानिक एजेंसी के अनुसार, रविवार सुबह 3:53 बजे ज्वालामुखी में 30 सेकंड के लिए धमाका हुआ। इसके लगभग 3 घंटे बाद एक दूसरा छोटा विस्फोट हुआ।
एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया ने कहा कि जुलाई से ज्वालामुखी की गतिविधि तेज हो गई थी। उन्होंने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में और विस्फोट होने की संभावना बनी हुई है।
असर
स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं, समुद्री यातायात पर भी असर
राख प्रभावित इलाकों में स्कूली कक्षाएं ऑनलाइन आयोजित की जा रही हैं। वहीं, समुद्री यातायात पर भी कुछ असर पड़ा है।
सैटेलाइट इमेज से पता चला है कि राख का एक बादल लगभग 20,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा और जकार्ता, बेंटेन और पश्चिम जावा के ऊपर से गुजरा।
वहीं, दूसरा बड़ा बादल लगभग 50,000 फीट की ऊंचाई तक जाकर बेंटेन, लाम्पुंग और बेंग्कुलु प्रांतों और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के एक हिस्से में फैल गया।
ज्वालामुखी
न्यूजबाइट्स प्लस
अनाक क्राकाटाऊ का मतलब है 'क्राकाटाऊ का बच्चा'। दरअसल, साल 1883 में मुख्य क्राकाटाऊ ज्वालामुखी में भयानक विस्फोट हुआ था, जिसमें 36,000 लोग मारे गए थे।
इसी जगह पर 1927 में समुद्र के नीचे एक ज्वालामुखी विस्फोट से अनाक क्राकाटोआ बना था। इसीलिए इसे क्राकाटाऊ का बच्चा कहा जाता है।
दिसंबर, 2018 में इस ज्वालामुखी के ढहने की वजह से एक विशाल सुनामी आई थी, जिसमें 400 से ज्यादा लोग मारे गए थे।