रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ नहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने कानून रोका
क्या है खबर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिंडसे ओ ग्राहम अधिनियम के तहत रूस के खिलाफ लगाए गए कई प्रतिबंधों, सीमाओं और शुल्कों को माफ कर दिया है। इस अधिनियम में भारत समेत 5 देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने का प्रावधान था। ट्रंप ने इस कदम को 'राष्ट्रीय हित' में बताते हुए कहा, "मैं ग्राहम एक्ट में दिए गए ऐसे प्रतिबंधों, पाबंदियों और कर्तव्यों को माफ कर रहा हूं।"
बयान
ट्रंप बोले- राष्ट्रीय हित में उठाया गया कदम
देर रात जारी एक कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा, "मैं ग्राहम अधिनियम में उल्लिखित ऐसे प्रतिबंधों, सीमाओं और कर्तव्यों के आवेदन को माफ कर रहा हूं। मैंने कांग्रेस को एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है कि इस समय ऐसी छूट जारी करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।"
हालांकि, प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ को फिलहाल केवल टाला गया है। ट्रंप चाहें तो बाद में इन्हें लागू कर सकते हैं।
कानून
क्या है ग्राहम कानून?
इस कानून के तहत रूस से तेल-गैस खरीदने वाले शीर्ष 5 खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इसमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल है।
इस विधेयक पर ट्रंप ने 18 सितंबर को हस्ताक्षर किए थे।
इस कानून का उद्देश्य रूस के ऊर्जा निर्यात को कम करना और यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए उसे बातचीत के लिए मजबूर करना था।
हालांकि, किस देश पर कितना टैरिफ लगेगा इसका अंतिम फैसला राष्ट्रपति को लेना था।
वजह
ट्रंप ने क्यों लगाई रोक?
दरअसल, 3 नवंबर को अमेरिका में मध्यावधि चुनाव है। उससे पहले डीजल की बढ़ती कीमतें ट्रंप प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।
सितंबर में कीमतें रिकॉर्ड 6.52 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गईं। चुनावों से पहले ट्रंप प्रशासन पर कीमतें कम करने का दबाव है। इसी वजह से हाल ही में ट्रंप ने रूस के साथ डीजल समझौता किया है। इसी के बाद अब रूसी प्रतिबंधों में ढील दी गई है।
भारत
भारत ने किया था विरोध
भारत भारी मात्रा में रूस से कच्चा तेल खरीदता है। कानून को लेकर भारत ने अमेरिका से कहा था कि इससे द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
भारत ने कहा था कि उसकी ऊर्जा खरीद सुरक्षित और किफायती आपूर्ति सुनिश्चित करने की जरूरत से निर्देशित होती है और करोड़ों नागरिकों की ऊर्जा जरूरतें पूरी करना उसकी पहली प्राथमिकता है।
वहीं, चीन ने भी प्रस्तावित उपायों का विरोध किया था।